करोड़ों की लूट और फिल्मी ड्रामा
बेंगलुरु में हाल ही में घटी एक सनसनीखेज लूट की घटना ने सबको हैरान कर दिया है। रात के करीब 11 बजे एक कारोबारी अपनी कार में भारी नकदी लेकर घर लौट रहे थे, तभी अचानक हुई एक टक्कर के बाद हथियारबंद बदमाशों ने उन्हें और उनके ड्राइवर को बंधक बनाकर अगवा कर लिया। पहली नजर में यह मामला सीधा-सीधा लूटपाट का लग रहा था, लेकिन पुलिस की बारीकी से की गई जांच ने इस कहानी को पूरी तरह पलट कर रख दिया। जिस ड्राइवर पर कारोबारी ने दो साल तक आँख बंद करके भरोसा किया, वही इस गिरोह का मुखबिर और पूरी साजिश का कथित मास्टरमाइंड निकला।
कारोबारी का सफर और नकदी का लेन-देन
पीड़ित कारोबारी शिवा शंकर उत्तर बेंगलुरु में एक सुरक्षा एजेंसी का संचालन करते हैं। पिछले करीब 10 वर्षों से वह आंध्र प्रदेश के तीन व्यापारियों, मोहम्मद परवेज, अलीम और जिप्सन के साथ साझेदारी में काम कर रहे थे। ये सभी लोग मिलकर 'अमेरिकन न्यूक्लियर रिसोर्स सेंटर' नाम की कंपनी के माध्यम से अपना कारोबार विस्तार करने की योजना बना रहे थे। इसी व्यावसायिक सिलसिले में तीनों साझेदार बेंगलुरु पहुंचे और येलहंका इलाके के एक होटल में ठहरे थे। 13 और 15 जून को इन तीनों व्यापारियों ने सुरक्षा के मद्देनजर कुल 1.09 करोड़ रुपये नकद शिवा शंकर को सौंपे थे। इस बड़ी राशि की जानकारी केवल पांच लोगों को थी, जिनमें शिवा शंकर, उनके तीन साझेदार और उनका ड्राइवर चेतन शामिल थे। यहीं से इस लूट की पटकथा लिखी गई।
सड़क पर कैसे रची गई साजिश
15 जून की रात करीब 11 बजकर 5 मिनट पर शिवा शंकर और उनका ड्राइवर चेतन होटल से अपनी कार में वापस लौट रहे थे। कार में डिक्की के अंदर 74 लाख रुपये नकद रखे थे। जैसे ही गाड़ी कुडुरेगेरे कॉलोनी में गणेश मंदिर के पास पहुंची, एक मोटरसाइकिल सवार ने जानबूझकर कार को टक्कर मार दी। जैसे ही चेतन ने कार रोकी, दूसरी गाड़ी ने आकर उनका रास्ता रोक लिया। उस गाड़ी से पांच हथियारबंद बदमाश उतरे और डरा-धमकाकर दोनों को जबरन अपनी कार में बिठा लिया। बदमाशों ने उन्हें नेलमंगला के सुनसान इलाके में ले जाकर भारी फिरौती की मांग की। शिवा शंकर ने अपनी जान बचाने के लिए एक झूठ बोला कि उनके घर पर 35 लाख रुपये और रखे हैं। यह झूठ उनके लिए मुसीबत का सबब बन गया क्योंकि बदमाश उन्हें घर लेकर गए और वहां से भी पैसे ऐंठ लिए। सुबह करीब 5 बजे बदमाशों ने दोनों को सुनसान जगह पर छोड़कर भागने में सफलता पाई। जब वे अपनी कार के पास लौटे, तो डिक्की से 74 लाख रुपये गायब थे। इस तरह कुल 1.09 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
पुलिस का शक और जांच का दायरा
घटना के बाद मदनायकनहल्ली थाने में मामला दर्ज कराया गया, लेकिन पुलिस को शुरू में पूरी कहानी पर संदेह था। दरअसल, शिवा शंकर का नाम पहले भी प्राचीन बर्तन ठगी जैसे मामलों में सामने आ चुका था, इसलिए अधिकारियों को लगा कि कहीं यह पूरी घटना बनावटी तो नहीं है। पुलिस ने लगातार कई दौर की पूछताछ की, लेकिन शिवा शंकर और उनके ड्राइवर चेतन के बयानों में कोई विरोधाभास नहीं दिखा। आखिरकार पुलिस ने एक बुनियादी सवाल किया कि आखिर इस पैसे की जानकारी किसे थी? जवाब मिला कि सिर्फ पांच लोगों को। पुलिस ने तीनों साझेदारों की सघन जांच की, लेकिन उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। अंततः शक की सुई पूरी तरह ड्राइवर चेतन पर आकर टिक गई।
कॉल डिटेल ने तोड़ी चुप्पी
पुलिस की जांच टीम ने ड्राइवर चेतन की मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाई, जिससे इस मामले का सबसे बड़ा सुराग हाथ लगा। चेतन लगातार सोमा नाम के एक हिस्ट्रीशीटर के संपर्क में था। पुलिस ने सोमा पर कड़ी निगरानी रखी और देखा कि वह अचानक बिना किसी बड़े काम के बहुत ज्यादा पैसा खर्च कर रहा है। सोमा को हिरासत में लेकर जब सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने सारी सच्चाई उगल दी। पुलिस के अनुसार चेतन पिछले दो साल से शिवा शंकर के यहां नौकरी कर रहा था और उसे मालिक के हर लेन-देन और नकदी की आवाजाही की पूरी खबर रहती थी। उसने ही अपने साथियों को सटीक मौके की जानकारी दी थी।
चेतन की नाकामी और पुलिस की सफलता
चेतन को पूरा विश्वास था कि वह बच जाएगा क्योंकि उसे लगा कि इतनी बड़ी नकदी का कोई कानूनी रिकॉर्ड नहीं है और उसका मालिक पहले से पुलिस के रडार पर होने के कारण शिकायत करने की हिम्मत नहीं करेगा। लेकिन, कारोबारी ने बिना डरे सीधे पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने अब तक इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें ड्राइवर एम. चेतन, सोमा, सूर्या, सिविल इंजीनियर बसवना गौड़ा और ऑटो चालक एम. विनय शामिल हैं। पुलिस ने अब तक आरोपियों के पास से 85 लाख रुपये नकद बरामद कर लिए हैं और बाकी पैसों की तलाश के लिए दबिश दी जा रही है।
सबक और निष्कर्ष
इस पूरी वारदात का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि अपराध किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि उस व्यक्ति ने अंजाम दिया जिस पर हर दिन भरोसा किया जाता था। सुरक्षा और सतर्कता के बावजूद चेतन ने अपने ही मालिक को लूटने की साजिश रची। यह घटना इस बात की सीख देती है कि व्यापारिक लेनदेन में अत्यधिक सावधानी के साथ-साथ अपने कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की भी पूरी जांच पड़ताल करना अनिवार्य है। हालांकि, तकनीक और फॉरेंसिक जांच की मदद से पुलिस ने इस फिल्मी अंदाज में रची गई लूट की गुत्थी को कुछ ही दिनों में सुलझा दिया।
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