कैमूर में भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना बनी जानलेवा, एक ही दिन में तीन लोगों की दर्दनाक मौत

बिहार के कैमूर जिले में भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना के निर्माण कार्य में लगे तेज रफ्तार वाहनों ने तीन लोगों की जान ले ली। अलग-अलग सड़क हादसों के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है।

तेज रफ्तार डंपर और भारी वाहनों का कहर

बिहार के कैमूर जिले में चल रही भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना स्थानीय निवासियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई है। इस परियोजना के निर्माण कार्य में उपयोग किए जा रहे डंपर और अन्य भारी वाहनों की बेलगाम रफ्तार ने जिले में सड़क हादसों की संख्या में इजाफा कर दिया है। मंगलवार को जिले के अलग-अलग हिस्सों में हुई सड़क दुर्घटनाओं में तीन लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इन घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों के शोकाकुल परिजनों ने पुलिस और स्थानीय प्रशासन पर भारी लापरवाही का आरोप लगाया है और सड़क सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग की है।

निर्माण कार्य और सुरक्षा पर सवाल

जिले के भभुआ समेत कई इलाकों में पिछले कई महीनों से भारतमाला एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य जोरों पर है। इस दौरान बड़ी संख्या में डंपर और ट्रक दिन-रात सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कंपनी के वाहन चालक यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अत्यधिक तेज गति से वाहन चलाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की ओर से इन वाहनों की गति पर कोई नियंत्रण नहीं है, जिसके कारण आम नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बार-बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में सुधार न होने से लोगों में भारी रोष व्याप्त है।

पहली घटना: सड़क पर तड़पता रहा युवक

जिले में मंगलवार को हुई पहली दुखद घटना कर्मनाशा और खजुरा के बीच दर्ज की गई। दुर्गावती थाना क्षेत्र के भोरेयां गांव के रहने वाले 24 वर्षीय रोहित सिंह अपने बनारस के रामनगर स्थित घर से वापस लौट रहे थे। इस दौरान एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि रोहित गंभीर रूप से घायल हो गए और करीब एक घंटे तक सड़क पर पड़े रहे। आरोप है कि समय पर मदद न मिलने के कारण उनकी स्थिति बिगड़ गई। बाद में स्थानीय लोगों की सहायता से उन्हें मोहनिया के अनुमंडल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मृतक के पिता वकील सिंह ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस को घटना की जानकारी दी गई थी, लेकिन वे समय पर घटनास्थल तक नहीं पहुंचे। उनका मानना है कि यदि प्रशासन ने तत्परता दिखाई होती, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी।

दूसरी घटना: दर्शन करने जा रहे श्रद्धालु की मौत

दूसरी दुर्घटना भभुआ-मुंडेश्वरी मार्ग पर घटित हुई। रामगढ़ थाना क्षेत्र के ऊपरी गांव के निवासी 40 वर्षीय राजेश राम मुंडेश्वरी मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। मंदिर से वापस लौटते समय, जब वे सड़क पार करके वाहन पकड़ने का प्रयास कर रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। आसपास के लोगों ने उन्हें तुरंत सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। हालांकि, बेहतर इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। राजेश राम अपने पीछे दो बेटों और दो बेटियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजनों ने अब जिला प्रशासन से उचित आर्थिक मुआवजे की मांग की है।

तीसरी घटना: मजदूर की जान

दिन की तीसरी दर्दनाक घटना भगवानपुर थाना क्षेत्र के औसान गांव के समीप हुई। यहां मजदूरी करके साइकिल से अपने घर लौट रहे एक मजदूर को सामने से आ रहे तेज रफ्तार डंपर ने जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इलाज के दौरान भगवानपुर थाना क्षेत्र के ही डिहां कला गांव निवासी जवाहर राम के पुत्र मुकेश कुमार ने दम तोड़ दिया। लगातार हो रही इन मौतों से क्षेत्र में शोक और गुस्से का माहौल है।

प्रशासन से सुरक्षा की मांग

इन घटनाओं के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि भारतमाला एक्सप्रेसवे परियोजना की आड़ में सड़कों पर मौत का तांडव चल रहा है। ग्रामीण अब जिलाधिकारी से यह मांग कर रहे हैं कि निर्माण कार्य में शामिल सभी भारी वाहनों की गति सीमा निर्धारित की जाए और उन पर निगरानी रखी जाए। इसके अतिरिक्त, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग भी जोर पकड़ रही है ताकि भविष्य में किसी और निर्दोष को अपनी जान न गंवानी पड़े।

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