नक्सलवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाले IPS पी. सुंदरराज कौन हैं? बस्तर से NIA तक का सफर

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों की कमान संभालने वाले आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज को अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी में बड़ी जिम्मेदारी मिली है। वे बस्तर में 14 वर्षों तक तैनात रहकर अपनी रणनीतियों के लिए चर्चा में रहे हैं।

बस्तर में बदली सुरक्षा की तस्वीर

छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका एक समय नक्सली हिंसा के लिए सुर्खियों में बना रहता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में वहां सुरक्षा तंत्र ने काफी मजबूती हासिल की है। इस क्षेत्र में नक्सलियों के प्रभाव को कम करने और उनके नेटवर्क को ध्वस्त करने में कई अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इनमें सबसे प्रमुख नाम 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी पी. सुंदरराज का है, जिन्होंने अपनी कार्यशैली और रणनीतियों से नक्सलवाद की कमर तोड़ने का काम किया है।

14 साल का लंबा संघर्ष

आईपीएस पी. सुंदरराज का बस्तर से गहरा नाता रहा है। उन्होंने बस्तर क्षेत्र में लगभग 14 साल तक अपनी सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों का न केवल नेतृत्व किया, बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा घेरा मजबूत करने के लिए भी काम किया। लंबे समय तक दुर्गम इलाकों में तैनाती के कारण उन्हें बस्तर की भौगोलिक स्थितियों और नक्सलियों की कार्यप्रणाली की गहरी समझ हासिल हुई, जिसका सीधा लाभ अभियानों के दौरान मिला।

NIA में मिली नई जिम्मेदारी

अपनी कार्यकुशलता और अनुभव के आधार पर पी. सुंदरराज को अब केंद्र सरकार ने बड़ी जिम्मेदारी दी है। उन्हें भारत की प्रमुख आतंकवाद विरोधी जांच एजेंसी, NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) में इंस्पेक्टर जनरल यानी IG के पद पर नियुक्त किया गया है। बस्तर में हिंसा पर लगाम लगाने के बाद अब वे अपनी नई भूमिका में देश की आंतरिक सुरक्षा और जांच कार्यों को मजबूती देंगे। उनकी इस नियुक्ति को एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।

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