झारखंड में खूनी जमीन विवाद: सब-रजिस्ट्रार की पत्थरों और लाठियों से पीट-पीटकर हत्या

रामगढ़ जिले में जमीन पर लगे समरसेबल पंप की जांच करने गए सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल की 10-15 लोगों ने निर्मम हत्या कर दी, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है।

खूनी संघर्ष में गई सरकारी अधिकारी की जान

झारखंड के रामगढ़ जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां जमीन विवाद के चलते एक सरकारी अधिकारी की जान चली गई। गिरिडीह में तैनात सब-रजिस्ट्रार बालेश्वर पटेल की बेरहमी से हत्या कर दी गई। यह वारदात तब हुई जब वे मांडू थाना क्षेत्र के हुवाग पंचायत अंतर्गत सिमरिया टांड़ इलाके में स्थित अपनी खरीदी हुई जमीन पर पहुंचे थे। वहां लगे समरसेबल पंप का जायजा लेने गए बालेश्वर पटेल पर अचानक हमलावरों ने हमला कर दिया। उन्हें लाठी-डंडों, ईंट और पत्थरों से बुरी तरह घायल कर दिया गया। परिजनों के अनुसार, उन्हें मरणासन्न हालत में रांची रोड के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

पंप देखने पहुंचे अधिकारी पर जानलेवा हमला

पीड़ित परिवार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, बालेश्वर पटेल मंगलवार की सुबह अपनी जमीन पर गए थे ताकि वहां लगे पंप की स्थिति को देखा जा सके। उसी दौरान जमीन को लेकर अपना हक जताने वाले स्थानीय लोगों से उनका विवाद हो गया। देखते ही देखते यह विवाद इतनी बुरी तरह बढ़ गया कि वह जानलेवा हमले में तब्दील हो गया। चश्मदीदों और परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद 10-15 लोगों की भीड़ ने सब-रजिस्ट्रार को घेर लिया और उन पर लाठी, डंडे, ईंट और पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही स्थिति गंभीर हो गई।

आरोपियों की लंबी फेहरिस्त और शिकायत

सब-रजिस्ट्रार की पत्नी रीता देवी ने इस घटना के संबंध में मांडू थाने में अपनी लिखित शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने कुल आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, जिनमें रामू साव उर्फ ज्ञानी साव, विष्णु कुमार, संतोष साव उर्फ पम्पम, पूजा देवी, रुबी देवी, शकुंतला देवी, विनय कुमार और डॉली कुमारी शामिल हैं। इसके अलावा, रीता देवी ने अपनी शिकायत में हेमंत पांडे और दिनेश्वर साव पर इस पूरी घटना के पीछे षड्यंत्र रचने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में यह भी जिक्र किया गया है कि घटना स्थल पर मौजूद महिला बबीता देवी को भी हमलावरों ने जान से मारने की धमकी दी थी।

जमीन का पुराना विवाद बना मौत की वजह

मांडू थाना प्रभारी सदानंद कुमार ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है और पूछताछ का दौर जारी है। फरार चल रहे अन्य आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि यह विवाद जमीन के मालिकाना हक और उसके उपयोग को लेकर काफी लंबे समय से चल रहा था। परिजनों का कहना है कि इस जमीन विवाद को सुलझाने के लिए पहले भी कई बार पंचायतें हुई थीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। थाना प्रभारी ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर कानूनी प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

विधायक की सख्त चेतावनी और जांच की मांग

इस दुखद घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंच गए। मांडू विधायक निर्मल कुमार महतो ने अस्पताल पहुंचकर घटना पर गहरा दुख जताया। उन्होंने इसे एक सरकारी अधिकारी की दिनदहाड़े हुई अत्यंत गंभीर हत्या करार दिया है। विधायक ने प्रशासन से मांग की कि दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया है कि जमीन के दस्तावेजों और पहले की पंचायत के निर्णयों के साथ-साथ मुकदमों की बारीकी से जांच हो, ताकि हत्या के पीछे की असल वजह का पता चल सके।

कानून व्यवस्था पर उठते सवाल

एक सरकारी अधिकारी की सरेआम हत्या ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब लोग जमीन विवादों को कानून के दायरे में सुलझाने के बजाय खुद न्याय करने का रास्ता चुनते हैं, तो परिणाम इसी तरह भयानक होते हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे मामले की गहनता से पड़ताल कर रहा है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और पुलिस घटना के हर पहलू, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, गवाहों के बयानों और जमीन के कागजों की जांच कर रही है। राज्य स्तर पर भी इस मामले की चर्चा तेज है और प्रशासन ने इलाके में शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश जारी किए हैं।

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