कुल्लू महिला मौत मामला: आमरण अनशन स्थल पर पहुंचे नेता, अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में एक महिला की मौत के बाद अस्पताल में जारी आमरण अनशन का मुद्दा गरमा गया है, जहां स्थानीय नेताओं के पहुंचने के साथ ही सरकार ने भी सख्त कार्रवाई का संकेत दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सराज घाटी स्थित बालीचौकी की रहने वाली 23 वर्षीय मंजू शर्मा की कुल्लू जिला अस्पताल में हुई मौत के बाद से इलाके में भारी रोष है। मंजू शर्मा को 21 जून को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डिलीवरी के बाद उन्होंने एक बेटी को जन्म दिया था। हालांकि, अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ती गई और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है।

अस्पताल परिसर में जारी आमरण अनशन

मंजू शर्मा की दुखद मौत के बाद उनके परिजन, रिश्तेदार और समाजसेवी बलदेव ठाकुर, जिन्हें बंटी सराजी के नाम से जाना जाता है, अस्पताल परिसर में आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। इस विरोध प्रदर्शन को शुरू हुए अब करीब 24 घंटे का समय बीत चुका है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, यह आंदोलन अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। प्रदर्शन स्थल पर न केवल स्थानीय लोगों का जमावड़ा लगा है, बल्कि सियासी नेताओं का भी आना-जाना शुरू हो गया है।

विधायक और पूर्व पार्षद के बीच तीखी नोकझोंक

मंगलवार के दिन स्थानीय विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने अस्पताल परिसर पहुंचकर अनशनकारियों से मुलाकात की। इस दौरान वहां मौजूद पूर्व जिला परिषद पार्षद रेखा गुलेरिया और विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के बीच जोरदार बहसबाजी और तूतू-मैं-मैं देखने को मिली। विधायक ने परिजनों को हरसंभव न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने अस्पताल प्रशासन और प्रशासनिक अधिकारियों से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि वे पिछली सरकार के कार्यकाल में इसी अस्पताल की व्यवस्था को सुधारने के लिए 40 दिन तक धरना दे चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टर अनु के खिलाफ दुर्व्यवहार की कई शिकायतें पहले भी मिल चुकी हैं और अब विभाग द्वारा सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का रुख और स्वास्थ्य मंत्री का बयान

इस पूरे मामले पर सुक्खू सरकार ने भी अपनी चुप्पी तोड़ दी है। हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने घटना पर गहरा दुख प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि वे खुद इस मामले से काफी द्रवित हैं और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धनीराम शांडिल ने पुष्टि की कि मामले की गहन जांच की जा रही है और सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगी। उन्होंने बताया कि जिस महिला डॉक्टर का नाम सामने आया है, उसके खिलाफ पहले भी एफआईआर दर्ज हो चुकी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शिमला से उच्च अधिकारियों को मौके पर भेजने का निर्णय लिया है।

पहले भी सामने आए हैं गंभीर आरोप

अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच, प्रदर्शन के दौरान 2022 से जुड़ा एक पुराना मामला भी सामने आया है। वहां मौजूद एक पीड़ित व्यक्ति ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उनकी पत्नी की डिलीवरी भी डॉक्टर अनु ने ही की थी। आरोप है कि उस समय सातवें महीने में ही डिलीवरी करवा दी गई थी और बाद में उनकी पत्नी को नेरचौक रेफर कर दिया गया था। पीड़ित ने बताया कि उस दौरान उन्हें 94 दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा था और उन्होंने पुलिस में शिकायत भी की थी, लेकिन उस समय मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। अब मंजू शर्मा मामले ने इन पुरानी शिकायतों को फिर से हवा दे दी है।

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