अंबाला में ऑपरेशन निर्भय: 12 साल की मन्नतों के बाद जन्मे मासूम को बचाने के लिए सेना की जद्दोजहद

हरियाणा के अंबाला में एक 4 वर्षीय बच्चा गहरे बोरवेल में जा गिरा, जिसके बाद प्रशासन ने युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है। 12 साल के लंबे इंतजार के बाद पैदा हुए निर्भय को सुरक्षित निकालने के लिए सेना और NDRF की टीमें मौके पर डटी हैं।

अंबाला में मासूम के लिए जंग

हरियाणा के अंबाला जिले के धन्यौडा गांव में मंगलवार की सुबह एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। चार साल का मासूम निर्भय खेतों में खेलते हुए अचानक एक खुले पड़े पुराने बोरवेल में समा गया। इस घटना के बाद से ही पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां की आंखों के आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं और पिता सदमे की स्थिति में हैं। पूरा गांव इस समय ईश्वर से एक ही प्रार्थना कर रहा है कि यह मासूम सुरक्षित बाहर निकल आए।

कैसे हुआ यह हादसा

मिली जानकारी के अनुसार, मंगलवार की सुबह करीब सात बजे निर्भय अपने दादा और पिता के साथ खेतों की ओर गया था। पिता और दादा खेत में अपने काम में व्यस्त थे और दादा पास ही बैठकर भोजन कर रहे थे। इसी दौरान चंचल स्वभाव का निर्भय खेलते-खेलते खेत में लावारिस पड़े एक पुराने बोरवेल के पास पहुंच गया। अचानक संतुलन बिगड़ने से वह सीधे गहरे बोरवेल के अंदर जा गिरा। जैसे ही बच्चे के गिरने की खबर मिली, परिवार में चीख-पुकार मच गई। आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बच्चा काफी नीचे जा चुका था।

युद्धस्तर पर बचाव कार्य

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो गया और राहत एवं बचाव का काम बड़े पैमाने पर शुरू कर दिया गया। मौके पर सेना, NDRF, SDRF, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की टीमें पहुंच गई हैं। वर्तमान में 60 से अधिक जवान इस रेस्क्यू ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। बचाव दल आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग कर रहा है। बोरवेल के अंदर कैमरा डालकर बच्चे की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखी जा रही है और विशेष उपकरणों एवं रस्सियों के जरिए उसे बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है। यदि आवश्यकता पड़ी, तो समानांतर खुदाई के लिए जेसीबी मशीनों का भी इंतजाम रखा गया है। मौके पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और क्षेत्र को बैरिकेडिंग से घेर दिया गया है ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई बाहरी बाधा न आए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी मुस्तैदी दिखाते हुए दो एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम को तैनात कर दिया है।

परिजन और गांव की स्थिति

गांव के सरपंच कप्तान सिंह ने भावुक होते हुए बताया कि निर्भय इस परिवार की खुशियों का इकलौता केंद्र था। करीब 12 वर्ष की लंबी प्रतीक्षा और अनेक मन्नतों के बाद इस बच्चे का जन्म हुआ था। निर्भय सोमवार को ही अपनी नानी के घर से वापस लौटा था और जल्द ही वह स्कूल जाने की तैयारी में था। किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अगले ही दिन यह परिवार ऐसे संकट में घिर जाएगा। ग्रामीण सुबह से ही घटना स्थल पर जमे हुए हैं। बचाव दल के लिए ग्रामीणों ने खाने और पानी की व्यवस्था की है। लोग हाथों में माला लिए प्रार्थना कर रहे हैं और आसमान की ओर देखकर बालक की सलामती की गुहार लगा रहे हैं।

खुले बोरवेलों पर उठते सवाल

यह दुखद घटना केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। हर साल खुले बोरवेलों के कारण न जाने कितने मासूमों की जान जोखिम में पड़ जाती है। यह मामला शासन और प्रशासन की लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल, अंबाला की जनता की निगाहें इस रेस्क्यू ऑपरेशन पर टिकी हैं। हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि 'निर्भय' नाम का यह बालक अपने नाम को सार्थक करते हुए इस विकट स्थिति से जीवित बाहर निकल आए। सेना के जवान पूरी तत्परता के साथ समय के खिलाफ यह लड़ाई लड़ रहे हैं।

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