मानसून में बढ़ता है संक्रमण का खतरा
बरसात का मौसम अपने साथ नमी और कीचड़ लेकर आता है, जिससे पशुओं में संक्रामक और गंभीर बीमारियों के पनपने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इस दौरान पशुपालकों को अपने मवेशियों की सेहत को लेकर बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। यदि थोड़ी भी लापरवाही बरती गई, तो यह न केवल पशुओं की जान के लिए खतरा बन सकती है, बल्कि दूध उत्पादन में भारी गिरावट का कारण भी बन सकती है। विशेष रूप से गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं में मानसून के समय कई बीमारियां तेजी से फैलती हैं।
इन तीन बीमारियों से बचाएं पशुओं को
पशु परिचारक कांशीराम यादव ने पशुपालकों को सलाह दी है कि बरसाती सीजन के आने से पहले मवेशियों का टीकाकरण करवाना अत्यंत अनिवार्य है। मुख्य रूप से तीन जानलेवा बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण जरूरी है:
- गलघोंटू (HS): यह बीमारी पशुओं के लिए बेहद घातक है।
- लंगड़ी बुखार (BQ): इसमें पशुओं को चलने-फिरने में भारी परेशानी होती है।
- खुरपका-मुंहपका (FMD): इसे छत्तीसगढ़ी में 'खुरा चपका' रोग भी कहा जाता है। यह बीमारी एक पशु से दूसरे पशु में बहुत तेजी से फैलती है, जिससे किसानों को बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है।
पशु परिचारक ने बताया कि इन गंभीर बीमारियों से सुरक्षा के लिए HS-BQ और FMD का टीका लगवाना अनिवार्य है।
गांव-गांव पहुंच रही है स्वास्थ्य विभाग की टीम
छत्तीसगढ़ पशुधन विकास विभाग की ओर से एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत गांव-गांव जाकर पशुओं का टीकाकरण किया जा रहा है। यह पूरी प्रक्रिया निशुल्क है। अगले लगभग एक महीने तक विभाग की टीमें सक्रिय रहेंगी ताकि अधिक से अधिक पशुओं को सुरक्षा कवच दिया जा सके। पशुपालकों से अपील की गई है कि वे अपनी जिम्मेदारी समझते हुए अपनी टीम का सहयोग करें और अपने पशुओं को टीका जरूर लगवाएं।
टीकाकरण से जुड़े भ्रांतियों का निवारण
अक्सर पशुपालकों के मन में यह डर रहता है कि टीका लगवाने से पशुओं का दूध उत्पादन घट सकता है या गर्भवती पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। कांशीराम यादव ने स्पष्ट किया है कि ये केवल निराधार भ्रांतियां हैं। टीकाकरण से पशुओं के दूध पर कोई स्थायी नकारात्मक असर नहीं पड़ता है और न ही इससे गर्भावस्था में कोई समस्या आती है। यदि कभी टीकाकरण के बाद अस्थायी रूप से दूध की मात्रा में मामूली कमी आती भी है, तो वह केवल 4 से 8 दिनों में पूरी तरह सामान्य हो जाती है।
पशुपालकों से यह आग्रह किया गया है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या अफवाहों में न आएं। समय रहते अपने पशुओं का टीकाकरण कराएं, ताकि बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा न्यूनतम हो और आपका पशुधन स्वस्थ व सुरक्षित बना रहे।
https://hindi.news18.com/news/chhattisgarh/raipur-monsoon-animal-diseases-vaccination-campaign-cattle-hs-bq-fmd-prevention-local18-10614615.html