ग्रेटर नोएडा: मुंगेर के राजमिस्त्री की निर्माणाधीन इमारत से गिरकर मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

ग्रेटर नोएडा में मजदूरी करने गए मुंगेर निवासी 37 वर्षीय फंटूश यादव की पांचवीं मंजिल से गिरने से दर्दनाक मौत हो गई, जिससे उनके परिवार का एकमात्र सहारा छिन गया है।

रोजगार की तलाश में गई जान

बिहार से रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने वाले मजदूरों के लिए जोखिम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। कोलकाता में तीन मजदूरों की दुखद मौत के मात्र चार दिन बाद ही एक और हृदयविदारक घटना सामने आई है। इस बार ग्रेटर नोएडा में मुंगेर जिले के एक राजमिस्त्री की निर्माणाधीन भवन से गिरकर जान चली गई। मृतक की पहचान असरगंज थाना क्षेत्र के सती स्थान गांव के रहने वाले 37 वर्षीय फंटूश यादव के तौर पर हुई है। वे स्वर्गीय गोपी यादव के पुत्र थे और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-31 में स्थित एक निर्माणाधीन भवन में राजमिस्त्री का कार्य कर रहे थे।

पांचवीं मंजिल से गिरने से हुई घटना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, कार्य के दौरान अचानक फंटूश यादव का संतुलन बिगड़ गया और वे सीधे पांचवीं मंजिल से नीचे आ गिरे। ऊंचाई से गिरने के कारण उन्हें अत्यंत गंभीर चोटें आईं, जिसके परिणामस्वरूप मौके पर ही उनकी मृत्यु हो गई। इस दुखद समाचार ने उनके गांव और परिवार को झकझोर कर रख दिया है। जब उनका शव उनके पैतृक गांव पहुंचा, तो परिजनों की करुण पुकार से पूरा माहौल गमगीन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए गांव के बड़ी संख्या में लोग उनके घर एकत्रित हुए।

परिवार का एकमात्र सहारा थे फंटूश

फंटूश यादव अपने परिवार के लिए एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उनकी असामयिक मृत्यु ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है। उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा तीन बच्चे हैं, जिनके नाम अंकुश कुमार, आरती कुमारी और अभिषेक कुमार हैं। पिता की मृत्यु के बाद बच्चों के सिर से साया उठ गया है और परिवार के सामने आर्थिक तंगी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में गहरा आक्रोश और दुख है।

सरकार और प्रशासन से मुआवजे की मांग

इस दुखद हादसे के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने सरकार से फंटूश यादव के परिवार को तत्काल उचित आर्थिक सहायता देने की पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि बिहार में रोजगार के सीमित अवसर होने के कारण ही हजारों कामगार अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरे राज्यों में जाकर काम करने के लिए विवश हैं। अक्सर इन स्थानों पर काम के दौरान मजदूरों की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होते हैं, जिससे ऐसे जानलेवा हादसे घटित होते रहते हैं।

सुरक्षा और रोजगार पर उठ रहे सवाल

लगातार हो रही इस तरह की घटनाएं राज्य की व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं। ग्रामीणों का यह मानना है कि दूसरे राज्यों में काम करने वाले बिहार के मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि उनके साथ कोई अप्रिय घटना न हो। इसके साथ ही, स्थानीय स्तर पर रोजगार के बेहतर और सुरक्षित अवसर पैदा करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि प्रदेश में ही पर्याप्त काम उपलब्ध हो जाए, तो मजदूरों को अपने परिवार से हजारों किलोमीटर दूर जाकर अपनी जान जोखिम में नहीं डालनी पड़ेगी। फिलहाल, पूरा गांव फंटूश के परिवार के साथ खड़ा है और प्रशासन से त्वरित मुआवजे की गुहार लगा रहा है।

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