सुल्तानपुर आजाद वर्मा हत्याकांड: एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई की मांग पर अड़े परिजन, 36 घंटे से नहीं हुआ अंतिम संस्कार, बढ़ा सियासी पारा

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में आजाद वर्मा की हत्या के बाद भारी बवाल मचा हुआ है। परिजन आरोपियों के एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई की मांग को लेकर शव के साथ धरने पर बैठे हैं।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में आजाद वर्मा हत्याकांड को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। घटना के 36 घंटे बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार ने मृतक का अंतिम संस्कार करने से साफ इनकार कर दिया है। परिजनों के इस कड़े रुख के कारण गोसाईगंज थाना क्षेत्र में जबरदस्त हंगामा और तनाव का माहौल बना हुआ है। मौके पर भारी पुलिस बल के साथ-साथ प्रशासन के आला अधिकारी भी तैनात हैं, जो लगातार परिवार को समझाने-बुझाने और गतिरोध को समाप्त करने की कोशिशों में जुटे हैं।

बुलडोजर कार्रवाई और एनकाउंटर की मांग पर अड़ा परिवार

पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे शव का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। परिजनों की मुख्य मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:

  • फरार चल रहे अन्य तीन आरोपियों का तुरंत पुलिस एनकाउंटर किया जाए।
  • आरोपियों के घरों पर उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर बुलडोजर कार्रवाई की जाए।
  • पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए।

प्रशासन और पीड़ित परिवार के बीच इस समय जबरदस्त गतिरोध बना हुआ है। अधिकारी लगातार परिजनों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन परिवार अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।

हत्याकांड पर गर्माई सियासत, सपा ने उठाए सवाल

रविवार शाम को पुरानी रंजिश के चलते आजाद वर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस वारदात के बाद से ही सुल्तानपुर का राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। सोमवार को पूर्व विधायक अरुण वर्मा लखनऊ पहुंचे और वहां से परिजनों के साथ शव लेकर सुल्तानपुर लौटे। इसके बाद से ही शव को रखकर प्रदर्शन जारी है।

इस पूरे मामले को लेकर समाजवादी पार्टी के नेता श्याम लाल निषाद ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासन पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। श्याम लाल निषाद ने कहा कि आजाद वर्मा ने दम तोड़ने से पहले अपना बयान दर्ज कराया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस और प्रशासन ठोस कदम उठाने में आनाकानी कर रहे हैं।

सपा नेता ने इस कार्रवाई को महज एक झूठी लीपापोती करार दिया। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि एक तरफ जब दूसरे मामलों में तुरंत एनकाउंटर जैसी सख्त कार्रवाइयां देखने को मिलती हैं, तो उनके भाई की हत्या के मामले में प्रशासन इतना ढीला रवैया क्यों अपना रहा है? उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि कानून की नजर में सभी नागरिक समान हैं और सभी को न्याय पाने का बराबर अधिकार है।

पुलिस प्रशासन का पक्ष और अब तक की गिरफ्तारियां

इस पूरे विवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जिले के अपर पुलिस अधीक्षक बृजनारायण सिंह ने आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस ने तुरंत सक्रियता दिखाई। पीड़ितों की लिखित तहरीर के आधार पर कुल छह नामजद आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया था।

आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई विशेष टीमों का गठन किया गया था, जो लगातार अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने नामजद छह आरोपियों में से तीन मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान इस प्रकार है:

  • सूरज पांडे
  • सत्यम पांडे
  • रूपम पांडे

अपर पुलिस अधीक्षक ने आश्वस्त किया है कि मामले में आगे की आवश्यक कानूनी और विधानिक कार्रवाई तेजी से पूरी की जा रही है। बाकी बचे तीन फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं और प्रशासन का दावा है कि उन्हें भी जल्द ही कानून के शिकंजे में ले लिया जाएगा। हालांकि, परिजनों के विरोध और राजनीतिक बयानों के चलते क्षेत्र में तनाव अभी भी चरम पर है।

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