बीकानेर में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
बीकानेर रेल मंडल के अंतर्गत अब मालगाड़ियों की आवाजाही को और अधिक सुव्यवस्थित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। रेलवे प्रशासन नाल और पलाना के मध्य एक नए गुड्स ट्रेन बाईपास रेलमार्ग के निर्माण की योजना पर तेजी से काम कर रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की घोषणा हाल ही में बीकानेर के दौरे पर आए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा की गई थी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर अनुमानित 448 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, जिसके लिए अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार करने का काम चल रहा है।
क्यों जरूरी है यह बाईपास मार्ग?
वर्तमान समय में बीकानेर स्टेशन और यार्ड पर मालगाड़ियों के भारी दबाव के कारण परिचालन में कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही हैं। मुख्य रूप से जैसलमेर की तरफ से आने वाली सभी मालगाड़ियों को बीकानेर स्टेशन और यार्ड से होकर गुजरना पड़ता है। इस वजह से न केवल मालगाड़ियों के संचालन में देरी होती है, बल्कि यात्री ट्रेनों की समयबद्धता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। नया बाईपास रेलमार्ग तैयार हो जाने के बाद, मालगाड़ियां शहर के मुख्य स्टेशन और यार्ड में प्रवेश किए बिना सीधे मेड़ता रोड की ओर निकल सकेंगी। इससे पूरे रेल नेटवर्क पर यातायात का बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा और ट्रेनों का संचालन अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
माल परिवहन में आएगी रिकॉर्ड तेजी
रेलवे के अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद माल ढुलाई की गति में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी। मालगाड़ियों को स्टेशन यार्ड में रुकना नहीं पड़ेगा, जिससे उनके सफर का समय कम होगा और ईंधन की भी काफी बचत होगी। समय और परिचालन लागत में होने वाली यह बचत रेलवे की आर्थिक दक्षता को बढ़ाने में मदद करेगी। इसके अतिरिक्त, रेलवे की माल परिवहन क्षमता में भी विस्तार होगा, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों तक कच्चे माल और उत्पादों की आपूर्ति पहले से कहीं अधिक तीव्र गति से सुनिश्चित की जा सकेगी। इससे स्थानीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों को एक नई रफ्तार मिलने की पूरी संभावना है।
बीकानेर शहर को मिलेंगे बड़े फायदे
यह परियोजना केवल रेलवे की परिचालन दक्षता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सकारात्मक प्रभाव बीकानेर शहर के निवासियों पर भी पड़ेंगे। लंबे समय से शहर के मध्य से गुजरने वाली मालगाड़ियों के कारण होने वाले शोर और प्रदूषण की समस्या एक बड़ी चिंता का विषय रही है। बाईपास बन जाने के बाद शहर के भीतरी इलाकों में अनावश्यक रेल यातायात का दबाव खत्म हो जाएगा, जिसका सीधा असर ध्वनि प्रदूषण में कमी और बेहतर पर्यावरणीय परिस्थितियों के रूप में देखने को मिलेगा। इसके साथ ही, यार्ड में मालगाड़ियों का हस्तक्षेप कम होने से यात्री ट्रेनों के समय पर चलने की उम्मीदें भी बढ़ जाएंगी, जिससे आम यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
भविष्य की जरूरतों के लिए एक आधुनिक कदम
आने वाले वर्षों में माल परिवहन की मांग में लगातार वृद्धि को देखते हुए रेलवे ने भविष्योन्मुखी रणनीति अपनाई है। नाल-पलाना गुड्स ट्रेन बाईपास बीकानेर रेल मंडल के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। जैसे ही इसकी डीपीआर का कार्य पूरा होगा और इसे आधिकारिक मंजूरी मिलेगी, निर्माण प्रक्रिया को धरातल पर उतार दिया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के उपरांत बीकानेर का रेल नेटवर्क न केवल आधुनिक बनेगा, बल्कि माल परिवहन के क्षेत्र में एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में उभरेगा। रेलवे प्रबंधन का स्पष्ट मानना है कि यह निवेश आने वाले समय में बीकानेर की रेल कनेक्टिविटी और परिचालन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करने वाला साबित होगा।
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