36 साल बाद फिर से सुर्खियों में सरला भट्ट हत्याकांड
कश्मीरी पंडित समुदाय के लिए नर्स सरला भट्ट का नाम उस गहरे घाव की तरह है, जिसे भुलाया नहीं जा सकता। करीब 36 साल पहले हुई उनकी नृशंस हत्या का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जम्मू-कश्मीर की जांच एजेंसी, जिसे एसआईए (SIA) के नाम से जाना जाता है, ने हाल ही में इस पुराने हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख यासीन मलिक समेत कुल पांच लोगों को नामजद किया गया है।
साजिश का था हिस्सा
जांच एजेंसियों का मानना है कि सरला भट्ट की हत्या कोई सामान्य घटना नहीं थी। इसे कश्मीरी पंडितों के मन में डर पैदा करने और उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर करने वाली एक बड़ी और व्यवस्थित साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। करीब 10 महीने पहले जब इस केस की फाइलें दोबारा खोली गईं, तो जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एजेंसी के मुताबिक, आतंकियों का मकसद इस तरह की घटनाओं के जरिए एक ऐसा खौफ पैदा करना था, जिससे कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग अपनी जड़ों को छोड़कर जाने के लिए मजबूर हो जाएं।
कौन थीं सरला भट्ट और क्या था उनका जज्बा
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीबाग इलाके की निवासी सरला भट्ट एक समर्पित स्वास्थ्यकर्मी थीं। वह श्रीनगर के प्रतिष्ठित शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में स्टाफ नर्स के तौर पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। 1990 की शुरुआत का दौर था, जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद अपने चरम पर था और कश्मीरी पंडितों का पलायन शुरू हो चुका था। बावजूद इसके, सरला भट्ट ने घाटी नहीं छोड़ने का साहसी निर्णय लिया। उनका मानना था कि एक नर्स के रूप में मरीजों की सेवा करना ही उनका सबसे बड़ा धर्म और कर्तव्य है। उन्होंने अपने काम को अपनी जान से ज्यादा तरजीह दी थी।
18 अप्रैल 1990 की वह खौफनाक रात
इतिहास के पन्नों में दर्ज 18 अप्रैल 1990 की रात सरला भट्ट के जीवन की आखिरी रात साबित हुई। हथियारों से लैस कुछ आतंकवादी उनके हॉस्टल में जबरन घुस आए और बंदूक की नोक पर उनका अपहरण कर लिया। अगले दिन, 19 अप्रैल 1990 को उनका शव श्रीनगर के मल्लाबाग इलाके से बरामद किया गया। उनके शरीर पर गोलियों के कई निशान थे, जो उनकी हत्या की बर्बरता को बयां करते थे। घटनास्थल से एक हाथ से लिखी हुई पर्ची भी मिली थी, जिसमें उन्हें पुलिस का मुखबिर करार देकर आतंकियों ने अपनी जिम्मेदारी का दावा किया था।
बर्बरता के आरोपों की सच्चाई
वर्षों से कश्मीरी पंडितों के संगठन यह दावा करते रहे हैं कि सरला भट्ट को मारने से पहले उन्हें भयानक यातनाएं दी गई थीं। कई संगठनों ने उनके साथ अपहरण के बाद दुष्कर्म और बर्बरता का भी आरोप लगाया था। हालांकि, उस समय पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में इन आरोपों का जिक्र नहीं मिलता है। आधिकारिक फाइलों में इस मामले को केवल अपहरण और हत्या के रूप में दर्ज किया गया था, जिसे लेकर समुदाय के भीतर गहरा असंतोष रहा है।
चार्जशीट में किन लोगों का है नाम
एसआईए की ओर से दायर की गई इस नई चार्जशीट में यासीन मलिक के अलावा चार अन्य आतंकियों का नाम है। इनमें से अब्दुल हमीद शेख, गुलाम मोहम्मद टपलू और मोहम्मद यूसुफ सोफी की मौत हो चुकी है, जबकि खुर्शीद अहमद चलकू अभी भी फरार है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि खुर्शीद अहमद चलकू पाकिस्तान में छिपा हो सकता है।
लगातार चल रही है पुरानी फाइलों की जांच
सरला भट्ट हत्याकांड की जांच को अगस्त 2025 में दोबारा शुरू किया गया था। इससे पहले एसआईए ने कश्मीरी पंडित जज नीलकंठ गंजू की हत्या के मामले की भी जांच दोबारा शुरू की थी। जज गंजू की हत्या 1989 में कर दी गई थी, क्योंकि उन्होंने जेकेएलएफ के संस्थापक मकबूल भट्ट को फांसी की सजा सुनाई थी। सरला भट्ट को आज भी उन बहादुर महिलाओं के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने आतंकवाद के काले दौर में झुकने के बजाय अपने कर्तव्य पथ पर अडिग रहना चुना था।
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