धान की खेती में खरपतवार की समस्या
धान की सीधी बुवाई यानी DSR तकनीक अपनाने वाले किसानों के सामने इन दिनों खरपतवार एक बड़ी समस्या बनकर उभरे हैं। हालांकि यह तकनीक पारंपरिक रोपाई की तुलना में काफी पानी बचाती है, लेकिन खेत में शुरुआती दिनों में खाली जगह होने के कारण खरपतवार बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। ये अनचाहे पौधे मुख्य फसल के साथ खाद, पानी और धूप के लिए मुकाबला करते हैं। यदि इन पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो फसल की वृद्धि रुक जाती है और उत्पादन में 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट देखने को मिल सकती है।
खरपतवार नियंत्रण का सही समय
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र गौतम का मानना है कि धान की सीधी बुवाई के 10 से 15 दिन बाद का समय खरपतवार प्रबंधन के लिए सबसे उपयुक्त होता है। इस समय को कृषि विज्ञान में गोल्डन पीरियड के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि इस अवस्था में खरपतवार अपने शुरुआती चरण में होते हैं और उन्हें नष्ट करना बहुत आसान होता है। देरी करने पर ये खरपतवार मजबूत हो जाते हैं और दवा का असर कम होने लगता है।
1 एकड़ खेत के लिए दवा की मात्रा
कृषि विशेषज्ञ अवनीश पटेल के अनुसार, सीधी बुवाई वाले धान में खरपतवार को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए बिस्पायरीबैक सोडियम 10% SC सबसे असरदार खरपतवार नाशक दवा है। एक एकड़ खेत के लिए इसकी 100 मिली मात्रा ही पर्याप्त होती है। इस दवा का सही प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए इसे लगभग 150 लीटर साफ पानी में अच्छी तरह मिलाकर घोल तैयार करें। छिड़काव के दौरान समान फैलाव के लिए किसानों को कट या फ्लैट फैन नोजल वाले स्प्रेयर का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
छिड़काव के समय रखें ये सावधानियां
दवा का प्रभावी असर हो, इसके लिए कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:
- खेत में छिड़काव के वक्त हल्की नमी होनी चाहिए, न तो खेत पूरी तरह सूखा हो और न ही उसमें पानी भरा हुआ हो।
- पानी भरा होने पर दवा पत्तियों पर नहीं टिक पाती और उसका प्रभाव कम हो जाता है।
- पूरी तरह सूखे खेत में छिड़काव करने से धान के मुख्य पौधों पर बुरा असर पड़ सकता है।
- छिड़काव करने के 2 से 3 दिन बाद खेत में हल्का पानी देना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
क्यों जरूरी है समय पर छिड़काव
कई किसान खरपतवार के बड़े होने का इंतजार करते हैं, जो कि एक बड़ी भूल है। खरपतवार जब 2 से 4 पत्ती की अवस्था में होते हैं, तब वे सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं और दवा को बहुत तेजी से सोख लेते हैं। मौसम का ध्यान रखना भी अनिवार्य है, इसलिए ऐसे दिन का चयन करें जब आकाश साफ हो और बारिश की संभावना न हो। सही समय पर वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर किसान न केवल खरपतवार से मुक्ति पा सकते हैं, बल्कि अपनी धान की पैदावार को भी कई गुना बढ़ा सकते हैं।
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