विकास कार्यों की अनदेखी पर सांसद का फूटा गुस्सा
मध्य प्रदेश के भिंड जिले में प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच तल्खी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। भिंड कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की उच्च स्तरीय बैठक में उस समय भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब क्षेत्रीय भाजपा सांसद संध्या राय ने अधिकारियों के रवैये पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया। सांसद ने बैठक के दौरान अधिकारियों के कामकाज के तौर-तरीकों पर सीधे सवाल उठाए और प्रोटोकॉल के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में कलेक्टर किरोड़ीलाल मीणा और गोहद क्षेत्र के विधायक केशव देसाई भी मौजूद थे। अधिकारियों की मौजूदगी में सांसद संध्या राय ने कड़े लहजे में पूछा कि आखिर क्षेत्र में होने वाले बड़े विकास कार्यों, भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रमों की आधिकारिक सूचना उन तक क्यों नहीं भेजी जाती है? उन्होंने अधिकारियों से सीधे सवाल किया, "क्या सांसदों को सूचित करना आपके प्रोटोकॉल के दायरे से बाहर है?"
प्रोटोकॉल के उल्लंघन पर उठाए तीखे सवाल
सांसद संध्या राय ने कलेक्ट्रेट सभागार में अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भिंड नगर पालिका और मेहगांव नगर पालिका के तहत कई बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें इसकी कोई पूर्व जानकारी नहीं दी जाती। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वार्डों में सीवर लाइन बिछाने जैसे महत्वपूर्ण काम चल रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से उन्हें पूरी तरह से अंधेरे में रखा जाता है।
सांसद ने बेहद तल्ख लहजे में याद दिलाया कि लगभग छह महीने पहले आयोजित की गई दिशा की बैठक में भी उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों के रवैये में कोई सुधार नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक निर्वाचित लोकसभा सदस्य के रूप में हर छोटे-बड़े विकास कार्य की जानकारी प्रोटोकॉल के तहत मिलना उनका अधिकार है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
'नल जल योजना' की जमीनी हकीकत पर खिंचाई
बैठक के अगले चरण में जब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा शुरू हुई, तो सांसद ने 'नल जल योजना' की ब्लॉकवार प्रगति रिपोर्ट तलब की। उन्होंने अधिकारियों से एक-एक कर पूछा कि जिले में अब तक कितनी ग्राम पंचायतों में यह योजना सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है, कितनी पंचायतों में काम अभी चल रहा है और कितनी योजनाएं संबंधित विभागों या पंचायतों को हस्तांतरित की जा चुकी हैं।
योजना के बेहतर क्रियान्वयन को लेकर सांसद ने अधिकारियों को निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश दिए:
- जल अर्पण कार्यक्रम का आयोजन: जिन गांवों में नल जल योजना का काम शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, वहां इसे एक उत्सव के रूप में मनाया जाए। 'जल अर्पण कार्यक्रम' के तहत ढोल-नगाड़े बजाकर ग्रामीणों को योजना शुरू होने की जानकारी दी जाए और इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से आमंत्रित किया जाए।
- बुनियादी सुविधाओं का सत्यापन: किसी भी जलापूर्ति योजना को हैंडओवर करने से पहले वहां बिजली की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- बिजली डीपी और पानी की टंकी की जांच: अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित स्थल पर बिजली की डीपी उपलब्ध हो और पानी की टंकी का निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुसार सही ढंग से पूरा हुआ हो।
लोक निर्माण विभाग की लापरवाही पर जताई नाराजगी
बैठक में सांसद संध्या राय का गुस्सा उस समय और बढ़ गया जब लोक निर्माण विभाग की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि सड़कों के सुदृढ़ीकरण और मजबूतीकरण योजना के तहत सांसद द्वारा भेजी गई कई महत्वपूर्ण सिफारिशों को विभाग ने पूरी तरह से ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
नाराज सांसद ने विभाग के अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पिछले 7 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने क्षेत्र की सड़कों के विकास और सुदृढ़ीकरण के लिए जितनी भी अनुशंसाएं भेजी थीं, उन पर विभाग ने कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया। उन्होंने बेहद नाराजगी के साथ कहा कि सिफारिशों पर काम करना तो दूर, विभाग ने उन्हें आज तक एक लिखित जवाब देना भी जरूरी नहीं समझा। उन्होंने चेतावनी दी कि जनप्रतिनिधियों के पत्रों और सिफारिशों की इस तरह की अनदेखी को भविष्य में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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