मानसून की आहट और अंबाला का डर
जैसे ही जुलाई का महीना करीब आता है, अंबाला शहर के निवासियों और विशेषकर व्यापारियों की चिंताएं बढ़ने लगती हैं। मानसून का आगमन जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत लेकर आता है, वहीं दूसरी ओर यह शहर के लिए जलभराव के रूप में एक बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़ा हो जाता है। शहर की अधिकांश सड़कें और गलियां थोड़ी सी बारिश में ही तालाब का रूप ले लेती हैं। इसका सबसे भयावह असर एशिया की प्रसिद्ध और विशाल कपड़ा मार्केट पर पड़ता है। इस बार मानसून के आने में केवल एक दिन का समय शेष रह गया है, जिसके कारण सभी की निगाहें नगर निगम द्वारा किए जा रहे सुरक्षात्मक कार्यों और उनकी तैयारियों पर टिकी हुई हैं।
हर साल का दंश झेलती है कपड़ा मार्केट
अंबाला की कपड़ा मार्केट का जलभराव से पुराना नाता है। हर साल बरसात के दौरान यहां की गलियों में पानी इस कदर भर जाता है कि दुकानों के भीतर तक प्रवेश कर जाता है। इस समस्या के कारण व्यापारियों को न केवल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि ग्राहक भी बाजार आने से परहेज करने लगते हैं। यह बाजार करोड़ों रुपये के व्यापार का केंद्र है, लेकिन जलभराव की समस्या इसकी गति को हर साल धीमा कर देती है। व्यापारियों के लिए यह एक ऐसा संकट है जिसका सामना वे सालों से कर रहे हैं, जिससे उनके काम पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
नगर निगम का सफाई अभियान और अतिक्रमण हटाओ मुहिम
इस बार इस पुरानी समस्या को जड़ से खत्म करने के इरादे से नगर निगम ने अपने सफाई अभियान को काफी तेज कर दिया है। निगम की टीम ने कपड़ा मार्केट के उस मुख्य नाले की पहचान की है जो वर्षों से बंद पड़ा था। अब इसे तोड़कर पूरी तरह साफ किया जा रहा है, ताकि जल निकासी का रास्ता सुगम हो सके। सफाई अभियान के साथ-साथ, नालों और नालियों पर किए गए अवैध अतिक्रमणों को हटाने का काम भी जोर-शोर से चल रहा है। निगम का मानना है कि यदि नालों पर से अतिक्रमण हटा दिया जाए, तो बारिश का पानी कहीं रुकेगा नहीं और सुगमता से आगे बढ़ जाएगा। हालांकि, मानसून से ठीक पहले शुरू हुई इस कवायद ने स्थानीय व्यापारियों के मन में यह सवाल जरूर पैदा कर दिया है कि क्या इतने कम समय में पूरी व्यवस्था को दुरुस्त कर पाना संभव होगा।
नगर निगम के जेई ने जताया भरोसा
नगर निगम के जेई राजेश ने स्पष्ट किया है कि विभाग मानसून को लेकर पूरी तरह सजग है। उन्होंने बताया कि कपड़ा मार्केट के लिए एक विशेष सफाई योजना बनाई गई है जिसके तहत हर उस नाले की सफाई की जा रही है जो पिछले काफी समय से उपेक्षित था। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि जहां भी अवैध निर्माण या कब्जे नालों के ऊपर किए गए थे, उन्हें हटाया जा रहा है। इसके अलावा, जो जल निकासी मार्ग बरसों से बंद पड़े थे, उन्हें दोबारा चालू किया जा रहा है। राजेश के अनुसार, इस बार जल निकासी की व्यवस्था पहले के मुकाबले काफी बेहतर रहने वाली है और व्यापारियों को पिछले वर्षों जैसी जलभराव की स्थिति से दो-चार नहीं होना पड़ेगा।
व्यापारियों का सुझाव: रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर हो काम
नगर निगम की ओर से की जा रही सफाई कार्रवाई का स्थानीय कपड़ा व्यापारी कमल गुलाटी ने स्वागत किया है। उन्होंने माना कि समय रहते नालों की सफाई करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सफाई से ही इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। कमल गुलाटी का सुझाव है कि नगर निगम को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को प्रभावी बनाने पर जोर देना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि बारिश के पानी को संरक्षित करने की एक पुख्ता प्रणाली विकसित की जाए, तो दो बड़े लाभ हो सकते हैं। पहला, सड़कों और मार्केट में पानी जमा नहीं होगा, और दूसरा, इस पानी को जमीन के भीतर पहुंचाकर भूजल स्तर में सुधार लाया जा सकता है। यह भविष्य के लिए पानी की कमी जैसी समस्याओं से निपटने का एक बेहतरीन तरीका साबित हो सकता है।
पहली बारिश में खुलेगा निगम के दावों का राज
अब पूरे शहर की नजरें मानसून की पहली तेज बारिश पर टिकी हैं। नगर निगम ने भले ही इस बार जलभराव से निजात दिलाने के बड़े-बड़े दावे किए हों, लेकिन असली परीक्षा मानसून की पहली बौछारें ही लेंगी। अगर इस बार कपड़ा मार्केट बारिश के पानी की मार से बच जाती है, तो इसे नगर निगम की एक बहुत बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जाएगा। इसके विपरीत, यदि स्थितियां पूर्ववत बनी रहती हैं, तो शहर की यह सबसे बड़ी व्यापारिक मंडी एक बार फिर भारी नुकसान और जलभराव का दंश झेलने को मजबूर होगी।
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