ऐतिहासिक मंदिर को मिला नया जीवन
बिहार के सीतामढ़ी शहर में स्थित ऐतिहासिक श्री राम विलास मंदिर अब पूरी तरह से नए और अलौकिक रूप में सज-धज कर तैयार है। इस मंदिर के जीर्णोद्धार की प्रक्रिया में कुल 42 महीने का समय लगा है। एक समय ऐसा था जब यह मंदिर बेहद जर्जर और उपेक्षित स्थिति में पहुंच गया था। कई लोगों को तो यह भी आशंका थी कि यह मंदिर धीरे-धीरे एक खंडहर में तब्दील हो जाएगा, लेकिन आज इसका बदला हुआ स्वरूप भक्तों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। वर्तमान में इस मंदिर की वास्तुकला और भव्यता इतनी प्रभावशाली है कि सीतामढ़ी शहर में फिलहाल इसके समान कोई अन्य धार्मिक स्थल दिखाई नहीं देता।
बीते दिनों की दुर्दशा और चुनौतियां
महज कुछ साल पहले तक इस मंदिर की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई थी। मंदिर का मुख्य परिसर आसपास के क्षेत्रों की तुलना में काफी नीचा था, जिसके कारण बरसात के मौसम में यहां भारी जलभराव की समस्या उत्पन्न हो जाती थी। मान्यता है कि वर्ष 1935 में स्थापित यह मंदिर माता सीता की पावन प्राकट्य भूमि से जुड़ा हुआ है। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह थी कि भगवान श्री राम, माता सीता और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को दशकों तक हर साल मानसून के दौरान लगभग दो फीट गहरे पानी के बीच रहने को मजबूर होना पड़ता था। इस कष्टकारी अतीत के कारण मंदिर की संरचना भी काफी कमजोर हो गई थी।
श्रद्धालुओं में खुशी और सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया
मंदिर के इस अभूतपूर्व कायाकल्प को देखकर सीतामढ़ी के निवासियों और देश भर के श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फेसबुक पर लोग इस बदलाव को लेकर काफी भावुक संदेश साझा कर रहे हैं। कई उपयोगकर्ताओं का कहना है कि जब स्वयं ईश्वर को बिना कष्ट झेले 'अच्छे दिन' प्राप्त नहीं हुए, तो फिर साधारण इंसानों की तो क्या ही बात है। मंदिर की नई भव्यता की प्रशंसा करते हुए लोग सोशल मीडिया पर जमकर पोस्ट लिख रहे हैं और इस निर्माण कार्य से जुड़े सभी लोगों की सराहना कर रहे हैं।
अयोध्या से की जा रही तुलना
भक्त इस मंदिर के जीर्णोद्धार की तुलना अयोध्या के प्रभु श्री राम मंदिर के निर्माण से कर रहे हैं। जिस प्रकार अयोध्या में प्रभु राम वर्षों तक तंबू में और कड़ी सुरक्षा के बीच रहने को विवश थे, और आज वे अपने भव्य महल में विराजमान हैं, ठीक उसी तरह सीतामढ़ी का यह श्री राम विलास मंदिर भी अब अपने पुराने कष्टों को पीछे छोड़ चुका है। आज यहां के विग्रह एक अत्यंत मनोहारी और भव्य दरबार में विराजित हैं। इस ऐतिहासिक स्थान का पुनर्निर्माण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सीतामढ़ी की सांस्कृतिक पहचान में भी एक नया और स्वर्णिम अध्याय जोड़ रहा है। मंदिर की अनुपम खूबसूरती ऐसी है कि जो भी इसे देखता है, उसका मन श्रद्धा और आनंद से भर जाता है। स्थानीय जनता इस अद्वितीय योगदान के लिए उन सभी लोगों का आभार व्यक्त कर रही है जिन्होंने इस कठिन कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में अपना सहयोग दिया है।
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