सोने के भाव में गिरावट और चांदी की चाल
कीमती धातुओं के बाजार में आज यानी 30 जून 2026 को निवेशकों के लिए मिलाजुला दिन रहा है। सोने की कीमतों में लगातार दबाव देखने को मिल रहा है, जिसके चलते इसके भाव में और कमी आई है। सुबह 9 बजे के आंकड़ों के अनुसार, मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर सोने का भाव 1150 रुपये की गिरावट के साथ 141252 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है। इसके विपरीत, चांदी की कीमतों में आज तेजी दर्ज की गई है। चांदी का भाव 609 रुपये बढ़कर 220015 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन सोने और चांदी के लिए काफी संवेदनशील साबित हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल
भारतीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी सोने और चांदी की चाल पर नजरें टिकी हुई हैं। Comex पर सोने की कीमतों में 0.90 प्रतिशत की फिसलन देखी गई है, जिसके बाद इसका दाम 4000 रुपये प्रति औंस के आसपास बना हुआ है। चांदी के वैश्विक भाव में भी 0.72 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है और यह 57.775 रुपये प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। पिछले कुछ दिनों से जारी गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, जिससे बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
कीमतें गिरने के प्रमुख कारण
निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सोने और चांदी के दाम क्यों कम हो रहे हैं? बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इसके पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं। पहला, मिडिल ईस्ट क्षेत्र में तनाव के कम होने की खबरें, जिसने सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग को प्रभावित किया है। दूसरा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख को लेकर बाजार में स्पष्टता है कि वे ब्याज दरों को फिलहाल ऊंचा बनाए रखेंगे। इसी कारण से मंगलवार को सोने की कीमत में 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई थी। इसके अलावा, सोना लगातार चौथे महीने मासिक आधार पर गिरावट की ओर बढ़ रहा है, जो बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर दिखा रहा है।
अमेरिकी आंकड़ों पर टिकी हैं नजरें
अब पूरी दुनिया की नजरें अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े आगामी आंकड़ों पर टिकी हैं। सोने की अगली बड़ी चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका के आर्थिक पैरामीटर्स क्या संकेत देते हैं। निवेशकों को विशेष रूप से इन रिपोर्टों का इंतजार है:
- अमेरिका का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस डेटा।
- ADP प्राइवेट पेरोल के आंकड़े।
- बेरोजगारी भत्ते से जुड़े दावे यानी Jobless Claims।
- शुक्रवार को जारी होने वाली नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट।
इन आंकड़ों से यह संकेत मिलेगा कि भविष्य में अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर क्या कदम उठा सकता है। यदि अमेरिकी आंकड़े मजबूती दिखाते हैं, तो डॉलर में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों को और नीचे धकेलने के रूप में दिखेगा। हालांकि, कमजोर आंकड़े आने की स्थिति में सोने को राहत मिल सकती है और कीमतों में सुधार की संभावना बनेगी।
तकनीकी चार्ट और रेजिस्टेंस लेवल
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर, सोने को दोबारा मजबूती प्राप्त करने के लिए कुछ कठिन पड़ावों को पार करना होगा। बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि पहला प्रमुख रेजिस्टेंस लेवल करीब 1,45,500 रुपये के आसपास है। इसके बाद, सबसे बड़ी चुनौती 20-दिन का मूविंग एवरेज है, जो लगभग 1,49,800 रुपये पर स्थित है। यदि सोने की कीमत इस स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहती है, तो अगले महीने यह 1,51,000 रुपये से 1,52,000 रुपये तक का सफर तय कर सकता है। लेकिन जब तक ये स्तर पार नहीं होते, तब तक बाजार में हर उछाल पर बिकवाली का दबाव बना रहने की पूरी आशंका है।
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले हफ्ते में बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। यदि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी प्रकार का नया तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो जाएगा, जो सीधे तौर पर कीमती धातुओं पर दबाव डालेगा। कुल मिलाकर, वर्तमान में बाजार का रुझान काफी कमजोर बना हुआ है और निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक घटनाक्रमों और आर्थिक आंकड़ों पर बारीक नजर रखें।
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