मानसून की बेरुखी: जून का महीना रहा सूखा, क्या जुलाई में राहत की उम्मीद है?

जून के बीतने के बाद भी देशभर में मानसून की स्थिति काफी कमजोर बनी हुई है, जिससे आम लोगों और किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। मौसम विभाग ने अब जुलाई के पहले हफ्ते से बेहतर बारिश का अनुमान जताया है।

जून में मानसून का सुस्त प्रदर्शन

पूरे भारत में लोग मानसून के आगमन की राह देख रहे हैं, लेकिन इस वर्ष मौसम का मिजाज उम्मीदों के विपरीत बना हुआ है। मौसम विभाग की कई भविष्यवाणियां धरी की धरी रह गई हैं और मानसून ने उत्तर भारत के बड़े हिस्सों में अब तक दस्तक नहीं दी है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और राजस्थान जैसे राज्यों के निवासी भीषण गर्मी और उमस से बेहाल हैं और झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं।

आंकड़ों में बारिश की कमी

मौसम के आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करें तो 1 जून से 27 जून के बीच देशभर में सामान्य से करीब 43 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। स्थिति यह है कि मेघालय, गुजरात, मणिपुर, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है।

क्यों बदल रही है मौसम की चाल?

मौसम विशेषज्ञों ने मानसून की इस सुस्ती के पीछे कई जटिल कारकों को जिम्मेदार माना है। इनमें मुख्य रूप से ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन, कमजोर सोमाली जेट और मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन जैसी मौसमीय गतिविधियां शामिल हैं। ये प्राकृतिक फेरबदल मानसून की गति और दिशा को प्रभावित कर रहे हैं।

किसानों की बढ़ती चिंता

खरीफ फसलों की बुआई का मौजूदा समय किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। बारिश में देरी के कारण खेती का काम प्रभावित हो रहा है, जिससे पैदावार को लेकर चिंता गहराने लगी है। वहीं, दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में आसमान में बादल तो दिखाई दे रहे हैं, लेकिन वे बरसने में नाकाम साबित हो रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार, जुलाई के पहले हफ्ते में उत्तर भारत में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है, हालांकि मौसम के अनिश्चित रुख को देखते हुए लोगों को फिलहाल और इंतजार करना पड़ सकता है।

https://hindi.news18.com/videos/nation/why-rain-is-not-happening-despite-monsoon-arrival-10615023.html