पटना की यह मशहूर जगह राजनीति का है केंद्र, मटन के स्वाद के लिए रोजाना खप जाते हैं 500 किलो से ज्यादा मीट

पटना के बिहार विधानसभा और न्यू सचिवालय के पास का इलाका मटन प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है, जहां रोजाना 500 किलो से अधिक मटन की बिक्री होती है।

राजनीति के गलियारों में मटन की महक

बिहार की राजधानी पटना का नाम सुनते ही सबसे पहले बिहार विधानसभा और सचिवालय जैसे बड़े सरकारी केंद्रों का ख्याल आता है। यह इलाका सत्ता के गलियारों के लिए तो मशहूर है ही, लेकिन बीते कुछ समय में यह मटन प्रेमियों के लिए एक मुख्य अड्डा बनकर उभरा है। विधानसभा और न्यू सचिवालय के बीच की सड़क के फुटपाथ पर स्थित मटन की दुकानें आज पटना के खानपान की पहचान बन चुकी हैं। यहां का मटन और चावल का स्वाद लोगों को इतना भाता है कि रोजाना यहां हजारों की भीड़ उमड़ पड़ती है।

हर दिन 500 किलो से अधिक की खपत

इस इलाके की सबसे बड़ी विशेषता यहां की मटन खपत की मात्रा है। आंकड़ों पर गौर करें तो इस पूरे क्षेत्र में 20 से अधिक दुकानें हर दिन सजती हैं। दुकानदारों के अनुसार, कामकाजी दिनों यानी सोमवार से शुक्रवार के बीच यहां का कारोबार चरम पर होता है। एक सामान्य दुकान पर रोजाना 50 से 60 किलो मटन की बिक्री आसानी से हो जाती है। यदि पूरे क्षेत्र के आंकड़ों को जोड़ा जाए तो रोजाना यहां करीब 500 किलो से ज्यादा मटन बिक जाता है। कई बार मांग इतनी ज्यादा होती है कि दोपहर ढलते-ढलते कई दुकानों पर मटन का एक टुकड़ा तक नहीं बचता। हालांकि, सरकारी कार्यालयों की छुट्टी वाले दिनों में यह बाजार थोड़ा सुस्त जरूर रहता है, लेकिन वर्किंग डेज में यहां पैर रखने की जगह नहीं होती।

दफ्तरों से सीधे लंच के लिए पहुंचती है भीड़

इस इलाके के व्यस्त होने के पीछे मुख्य कारण सरकारी दफ्तरों की मौजूदगी है। बिहार विधानसभा, न्यू सचिवालय और अन्य सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी लंच ब्रेक के दौरान यहां मटन-चावल का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। इसके अलावा, सरकारी कामों के सिलसिले में आने वाले लोग और स्थानीय निवासी भी यहां की रौनक बढ़ाते हैं। सुबह 10 बजे तक फुटपाथ पर दुकानों का पूरा ढांचा सज जाता है और फिर दोपहर के भोजन के समय तक यहां खाने वालों की लंबी लाइनें लग जाती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल और खास पहचान

इन दुकानों की लोकप्रियता सिर्फ स्थानीय लोगों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया के माध्यम से ये दुकानें पूरे राज्य में मशहूर हो चुकी हैं। इंटरनेट पर इनके स्वाद के चर्चे आम हैं। इन दुकानों में कुछ नाम बहुत चर्चित हैं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • बंगाली बाबा का मटन
  • मैडम जी का मटन
  • हिचकी मटन

इन दुकानों के वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लाखों लोगों ने देखा है। स्वाद और मसालों के अनोखे मिश्रण के कारण ये दुकानें बाकी जगहों से काफी अलग मानी जाती हैं। मैडम जी ढाबा की संचालिका बताती हैं कि उनकी दिनचर्या सुबह 5 बजे से ही शुरू हो जाती है। मटन बनाने की प्रक्रिया घंटों चलती है ताकि स्वाद में कोई कमी न रहे। ग्राहकों को मटन के साथ भरपूर ग्रेवी, अनलिमिटेड चावल और प्याज परोसा जाता है, जो उनके अनुभव को और भी खास बनाता है।

प्रशासनिक चुनौती और लोगों का लगाव

इस पूरे इलाके का दृश्य काफी दिलचस्प होता है। सड़क के किनारे लगी इन दुकानों को चलाने वाले दुकानदार अक्सर गुजरने वाले लोगों को अपनी ओर बुलाते हुए देखे जा सकते हैं। इस फुटपाथ पर अतिक्रमण एक बड़ी चुनौती बना रहता है। समय-समय पर प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान भी चलाया जाता है, लेकिन यह एक चक्र की तरह है। कार्रवाई के अगले ही दिन, फिर से वही दुकानें सज जाती हैं और मटन की खुशबू पूरे माहौल में घुलने लगती है। तेज धूप और गर्मी की परवाह किए बिना, दोपहर के समय यहां लोगों की भारी तादाद यह साबित करती है कि यह मटन का स्वाद लोगों की पहली पसंद बन चुका है।

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