जांच रिपोर्ट का इंतजार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुई दर्दनाक अग्निकांड की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल यानी SIT आज अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप सकती है। इस भीषण हादसे में कुल 15 लोगों की जान गई थी, जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दो सदस्यीय SIT का गठन किया था और एक सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने के निर्देश दिए थे।
विभिन्न विभागों की भूमिका की पड़ताल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), नगर निगम, अग्निशमन विभाग और विद्युत विभाग ने अपनी अलग-अलग जांच रिपोर्ट पहले ही शासन को भेज दी है। SIT ने इन सभी रिपोर्टों का बारीकी से अध्ययन किया है। जांच के दौरान SIT ने भवन के मालिक, संबंधित विभागों के अधिकारियों, घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों और हादसे में पीड़ित परिवारों के बयान दर्ज किए हैं। इसके अतिरिक्त, इमारत के नक्शे, निर्माण की मंजूरी, अग्निशमन सुरक्षा से जुड़े इंतजाम और संस्थान के संचालन से संबंधित दस्तावेजों की भी गहन छानबीन की गई है। माना जा रहा है कि इन सभी तथ्यों के मिलान के बाद ही रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया गया है, जिसके आधार पर अब दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती
इस बीच, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने लखनऊ के जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा है। इसे मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन मानते हुए आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को भी निर्देशित किया है कि वे दो हफ्ते के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करें। आयोग ने राज्य में 'कोचिंग सेंटर रेगुलेशन गाइडलाइंस 2024' को सख्ती से लागू करने और घायलों के उचित उपचार तथा पीड़ित परिवारों को हर संभव राहत प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण भी मांगा गया है।
भवन मालिक की मुश्किलें बढ़ीं
अलीगंज अग्निकांड मामले में इमारत के मालिक वीरेंद्र शुक्ला की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला बिजली कनेक्शन प्राप्त करने के लिए कथित रूप से फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जमा करने से जुड़ा है। विद्युत सुरक्षा विभाग के सहायक निदेशक आलोक शुक्ला द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, जांच के दौरान यह फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि 2016 में प्राप्त की गई उस NOC पर तत्कालीन सहायक निदेशक पीके निगम के हस्ताक्षर असली नहीं थे। इतना ही नहीं, उस दस्तावेज की लिखावट, फॉन्ट साइज और कागज का प्रकार भी विद्युत सुरक्षा विभाग के आधिकारिक मानकों से मेल नहीं खाता है।
कैसे हुआ था यह भीषण हादसा
गौरतलब है कि 22 जून को लखनऊ के अलीगंज स्थित एक बहुमंजिला इमारत में आग लग गई थी। यह इमारत कई प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियों का केंद्र थी, जहां कोचिंग सेंटर, पुस्तकालय और एनीमेशन स्टूडियो जैसे प्रतिष्ठान संचालित हो रहे थे। आग लगने की इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अब सभी की निगाहें SIT की उस रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इतनी बड़ी लापरवाही के लिए कौन-कौन से अधिकारी और जिम्मेदार लोग जवाबदेह होंगे।
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