भविष्य के युद्ध और ड्रोन शक्ति के लिए कितनी तैयार है भारतीय सेना? सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने रिटायरमेंट से पहले दिया जवाब

भारतीय सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने अपने कार्यकाल के अंतिम क्षणों में भविष्य के युद्धों, तकनीकी बदलावों और स्वदेशी रक्षा आत्मनिर्भरता पर विस्तार से बात की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना ड्रोन तकनीक से लेकर आधुनिक युद्धक प्रणालियों के मामले में खुद को कैसे तेजी से रूपांतरित कर रही है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा और सीमा प्रबंधन की स्थिति

भारतीय सेना के प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए कहा कि उत्तरी सीमाओं पर हालात स्थिर हैं। हाल के समय में हुए समझौतों ने जमीन पर स्थिरता की स्थिति को बेहतर बनाया है। दोनों पक्षों ने एक दूसरे की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है। सैन्य स्तर की वार्ता, हॉटलाइन, फ्लैग मीटिंग और कमांडर स्तर की बैठकों का तंत्र काफी प्रभावी ढंग से काम कर रहा है। सीमा प्रबंधन को बेहतर बनाने और गलतफहमियों को दूर करने के लिए जमीनी स्तर पर भी लगातार संवाद जारी है। सेना की प्राथमिकताओं को लेकर प्रमुख ने तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया। पहली प्राथमिकता एलएसी पर शांति बनाए रखना है, दूसरी स्थानीय विवादों को आपसी बातचीत के जरिए हल करना है और तीसरी, किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए मजबूत तथा विश्वसनीय सैन्य तैनाती को बरकरार रखना है।

ऑपरेशन सिंदूर और उससे मिले सबक

जब ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी क्षमताओं के बारे में सवाल किया गया, तो सेना प्रमुख ने इसे भारत के अटूट संकल्प और संयम का एक उदाहरण बताया। यह आतंकवाद के खिलाफ एक सटीक और संतुलित सैन्य कार्रवाई थी जिसे पूरी तैयारी के साथ अंजाम दिया गया। इस ऑपरेशन ने साबित किया कि आधुनिक युद्ध केवल भारी हथियारों के दम पर नहीं जीते जाते। आज के दौर में सटीक जानकारी, एकीकृत योजना, सुरक्षित संचार माध्यम, सही सूचना प्रबंधन और सटीक कार्रवाई का तालमेल बहुत जरूरी हो गया है। भविष्य के संघर्षों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर में जारी युद्धों से स्पष्ट है कि युद्ध लंबे और कठिन हो सकते हैं, लेकिन साथ ही छोटे और तीव्र तकनीक-आधारित संघर्षों की संभावना भी हमेशा बनी रहती है। इन सभी परिस्थितियों में जीत हासिल करने के लिए सेना के पास बेहतर समन्वय और विश्वसनीय सूचना तंत्र का होना अनिवार्य है।

युद्ध के बदलते स्वरूप और सेना का आधुनिकीकरण

युद्ध का चेहरा तेजी से बदल रहा है और भारतीय सेना इस बदलाव के अनुकूल खुद को ढाल रही है। सेना प्रमुख ने बताया कि आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए हथियार खरीदना नहीं है। इसमें सेना का ढांचा, प्रशिक्षण पद्धति, नई तकनीक, काम करने का नजरिया और मानव संसाधन का सही इस्तेमाल शामिल है। भविष्य के युद्ध में त्वरित निर्णय लेना महत्वपूर्ण होगा, जिसके लिए निगरानी, संचार और कमांडरों के बीच बेहतर तालमेल पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। सेना ने अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अशनि ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरियों जैसी इकाइयों को शामिल किया है। इसके अलावा बाज बटालियन की पहल भी काफी महत्वपूर्ण है। इसे मौजूदा दूर से संचालित विमान इकाइयों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इन इकाइयों में विशेष रूप से प्रशिक्षित सैनिक होंगे जो युद्धक्षेत्र में खुफिया जानकारी जुटाने और तेज प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे।

ड्रोन की भूमिका और भविष्य की रणनीति

आधुनिक सैन्य अभियानों में ड्रोन की भूमिका को सेना प्रमुख ने अपरिहार्य बताया। उनका मानना है कि ड्रोन केवल निगरानी के साधन नहीं रह गए हैं। आज इनका इस्तेमाल लक्ष्य को पहचानने, सटीक हमले करने, रसद की आपूर्ति करने और युद्ध के बाद हुए नुकसान का आकलन करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में हो रहा है। सेना का लक्ष्य केवल बड़ी संख्या में ड्रोन खरीदना नहीं है, बल्कि एक पूरी ड्रोन पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। इसमें स्वदेशी निर्माण, कुशल जनशक्ति, समय पर रखरखाव, नियमित प्रशिक्षण और ड्रोन-रोधी प्रणालियों का विकास शामिल है। इन सभी प्रयासों का उद्देश्य भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारतीय सैनिकों को तकनीकी बढ़त दिलाना है।

आत्मनिर्भरता और रक्षा उद्योग की भागीदारी

सेना प्रमुख ने जोर दिया कि आत्मनिर्भरता अब भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की तैयारियों की नींव बन चुकी है। किसी भी संकट के दौरान देश को अपनी घरेलू प्रणालियों और रक्षा उद्योग पर भरोसा करने में सक्षम होना चाहिए। डीआरडीओ, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी उद्योग, एमएसएमई, स्टार्ट-अप और शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर सेना तेजी से स्वदेशी समाधान विकसित कर रही है। भारत की भौगोलिक सीमाएं और सैन्य चुनौतियां अन्य देशों से भिन्न हैं, इसलिए यहां के समाधान भी स्वदेशी होने चाहिए। लंबी दूरी तक सटीक प्रहार करने वाले हथियार, उन्नत गोला-बारूद, ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और मजबूत संचार नेटवर्क अब सेना की प्राथमिकता हैं। इन स्वदेशी प्रणालियों को जल्दी से सेना में शामिल करना ही भविष्य की जीत सुनिश्चित करेगा।

https://www.indiatv.in/india/national/indian-army-chief-general-upendra-dwivedi-exclusive-interview-on-india-tv-talks-about-future-warfare-drone-capabilities-and-other-issues-2026-06-30-1228166