चीन को पछाड़ने के लिए भारत है एकमात्र उम्मीद, अमेरिकी अधिकारी ने माना भारतीय प्रतिभा का लोहा

अमेरिका के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने कहा कि इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र में भारत ही चीन को कड़ी टक्कर देने वाला इकलौता देश है। उन्होंने भारत को AI और डीप-टेक के मामले में अमेरिका का सबसे स्वाभाविक और भरोसेमंद साझेदार बताया है।

अमेरिका का भारत की क्षमताओं पर भरोसा

दुनिया भर में भारत की तेजी से बढ़ती तकनीकी ताकत का लोहा अब अमेरिका भी मानने लगा है। हाल ही में अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने भारत को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि दुनिया में कोई एक ऐसा देश है जो इंजीनियरिंग टैलेंट और वर्कफोर्स के मामले में चीन को सीधी और वास्तविक चुनौती दे सकता है, तो वह केवल भारत है। वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रमुख लीडरशिप समिट के दौरान हेलबर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य के तकनीकी दौर में भारत की भूमिका निर्णायक होगी।

AI और डीप-टेक में भारत-अमेरिका की साझेदारी

जैकब हेलबर्ग ने भारत को AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीप-टेक के क्षेत्र में अमेरिका का सबसे स्वाभाविक साझेदार करार दिया है। उन्होंने कहा कि भारत न केवल एक विशाल बाजार है, बल्कि वहां का तकनीकी इकोसिस्टम भी बहुत तेजी से परिपक्व हो रहा है। हेलबर्ग के अनुसार, आने वाले समय में अत्याधुनिक नवाचार और नई तकनीकों को आम जनता तक पहुँचाने में भारत की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। अमेरिका अब भारत के साथ मिलकर एक ऐसा डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है, जो दोनों देशों के बीच तकनीकी संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा सके।

इंजीनियरिंग टैलेंट की ताकत

हेलबर्ग का मानना है कि भारत के पास जिस तरह का विशाल इंजीनियरिंग टैलेंट पूल है, वह दुनिया के किसी अन्य देश के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि चीन के मुकाबले में अगर कोई देश मजबूती से खड़ा हो सकता है, तो वह अपनी प्रतिभा और कौशल के दम पर भारत ही है। भारत की अर्थव्यवस्था जिस गति से आगे बढ़ रही है और जिस प्रकार वहां नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, वह उसे वैश्विक स्तर पर एक अनिवार्य केंद्र बनाता है। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीकी भविष्य की दिशा तय करने में अमेरिका और भारत की सोच पूरी तरह से एक समान है, जो दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को और अधिक गहरा बनाएगी।

सहयोग की नई राहें

तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका लगातार प्रयास कर रहा है। हेलबर्ग ने जानकारी दी कि अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने ट्रस्टेड पार्टनर प्रोग्राम की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को गति देना है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में उच्च स्तर पर लगातार बातचीत चल रही है। इससे पहले भी, हेलबर्ग ने भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन के साथ महत्वपूर्ण मुलाकात की थी। इस बैठक में मुख्य रूप से वैश्विक AI अर्थव्यवस्था में सहयोग को बढ़ाने और अमेरिकी कंपनियों को भारत के भीतर अनुसंधान और नवाचार करने के लिए प्रोत्साहित करने पर चर्चा की गई थी।

भविष्य के लिए मजबूत नींव

निष्कर्ष के तौर पर, अमेरिकी अवर सचिव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को लेकर अमेरिका की रणनीति अब केवल एक व्यापारिक साझेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई एक व्यापक साझेदारी है। भारत की बढ़ती हुई इंजीनियरिंग क्षमताएं और तकनीकी इकोसिस्टम उसे अमेरिका के लिए एक आदर्श विकल्प के रूप में स्थापित करते हैं।

  • भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल मौजूद है।
  • AI और डीप-टेक में भारत अमेरिका का स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार है।
  • अमेरिकी वाणिज्य विभाग के ट्रस्टेड पार्टनर प्रोग्राम से तकनीकी सहयोग को बल मिलेगा।
  • भारत का तकनीकी इकोसिस्टम भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है।

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