भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में टर्टल सर्वे: पहली बार मिलीं कछुओं की 7 दुर्लभ प्रजातियां

राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध केवलादेव नेशनल पार्क में आयोजित पहले टर्टल सर्वे के दौरान कछुओं की सात अलग-अलग प्रजातियों की पहचान की गई है, जो क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को दर्शाता है।

इकोसिस्टम की मजबूती का प्रमाण

भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क ने एक बार फिर अपनी समृद्ध जैव विविधता का लोहा मनवाया है। पक्षियों के लिए मशहूर इस अभयारण्य में पहली बार आयोजित हुए टर्टल सर्वे ने कई नए रिकॉर्ड बनाए हैं। शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों की टीम ने पार्क के भीतर कछुओं की कुल 7 प्रजातियों को खोज निकाला है। इसे पर्यावरण विशेषज्ञों ने एक दुर्लभ और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

डिग्गी क्षेत्र में दिखीं विविधता

सर्वेक्षण के दौरान सबसे रोमांचक स्थिति डिग्गी क्षेत्र में देखने को मिली। विशेषज्ञों की टीम ने पाया कि इस एक छोटे से क्षेत्र में एक साथ 5 अलग-अलग प्रजातियों के कछुए मौजूद थे। वन्यजीव प्रेमियों और पार्क प्रशासन के लिए यह आंकड़ा काफी उत्साहजनक है।

क्या कहते हैं अधिकारी

डीएफओ चेतन कुमार ने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह परिणाम पार्क के संतुलित इकोसिस्टम और यहाँ के सुरक्षित वेटलैंड का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने आगे कहा कि 7 प्रजातियों की उपस्थिति इस बात को सुनिश्चित करती है कि पार्क का जलीय वातावरण कछुओं के रहने के लिए पूरी तरह अनुकूल है।

संरक्षण के लिए जरूरी है डेटा

विशेषज्ञों का मानना है कि कछुओं की यह संतोषजनक संख्या जल की उत्तम गुणवत्ता और स्वस्थ पर्यावरण की परिचायक है। भविष्य में इस प्रकार के सर्वे का आयोजन पार्क की संरक्षण योजनाओं को अधिक प्रभावी और सटीक बनाने में मदद करेगा। इस डेटा के आधार पर वन्यजीव प्रबंधन की नई रणनीतियां तैयार की जाएंगी, ताकि इन दुर्लभ प्रजातियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

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