धनबाद में प्रिंस खान के करीबियों पर बड़ा प्रहार, गोल्डेन वेडिंग पैलेस गिराने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम

धनबाद नगर निगम ने अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती दिखाते हुए भूली बाईपास रोड स्थित गोल्डेन वेडिंग पैलेस को ध्वस्त करने का आदेश दिया है और मालिक पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इस कार्रवाई को गैंगस्टर प्रिंस खान के नेटवर्क पर प्रशासन की कड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है।

अवैध निर्माण पर नगर निगम का सख्त रुख

झारखंड के धनबाद जिले में नगर निगम प्रशासन ने अवैध निर्माणों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा कदम उठाया है। शहर के चर्चित भूली बाईपास रोड पर स्थित गोल्डेन वेडिंग पैलेस के खिलाफ ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया गया है। निगम का स्पष्ट मानना है कि यह व्यावसायिक ढांचा नियमों को ताक पर रखकर खड़ा किया गया था। इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम ने भवन के मालिक को अपना निर्माण खुद हटाने के लिए मात्र 15 दिनों का समय दिया है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भवन मालिक द्वारा स्वैच्छिक रूप से निर्माण को नहीं हटाया जाता है, तो नगर निगम स्वयं बुलडोजर चलाकर इसे ध्वस्त करेगा। सबसे अहम बात यह है कि इस पूरी तोड़फोड़ की प्रक्रिया में जितना भी खर्च आएगा, उसकी वसूली सीधे तौर पर भवन मालिक से ही की जाएगी। इसके अतिरिक्त, नियमों के घोर उल्लंघन को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित व्यक्ति पर 10 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।

बिना नक्शे के खड़ा किया गया था व्यावसायिक ढांचा

इस बड़े एक्शन के पीछे की कानूनी प्रक्रिया की बात करें, तो नगर निगम ने भवन वाद संख्या-02/2026 के अंतर्गत पूरी सुनवाई पूरी की। निगम के अधिकारियों ने जब दस्तावेजों की गहन जांच की, तो यह तथ्य सामने आया कि गोल्डेन वेडिंग पैलेस का निर्माण कार्य पूरी तरह से अवैध था। इसके लिए नगर निगम से किसी भी प्रकार का भवन नक्शा स्वीकृत नहीं कराया गया था। इतना ही नहीं, जांच में यह भी पाया गया कि मैरेज हॉल के रूप में इस्तेमाल हो रही इस इमारत में बुनियादी सुरक्षा और निर्माण मानकों की धज्जियां उड़ाई गई थीं। यहां अनिवार्य सेटबैक और पार्किंग की उचित व्यवस्था नदारद पाई गई, जो किसी भी बड़े व्यावसायिक परिसर के लिए अनिवार्य होती है।

सुनवाई के दौरान मालिक नहीं दे सके जवाब

नगर निगम प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने का दावा किया है। सुनवाई की लंबी अवधि के दौरान भवन मालिक को अपना पक्ष रखने और निर्माण से संबंधित सभी वैध दस्तावेज पेश करने के पर्याप्त अवसर दिए गए थे। हालांकि, वे किसी भी स्तर पर निर्माण की अनुमति से जुड़ा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहे। सुनवाई के दौरान स्वयं भवन मालिक ने इस बात को स्वीकार किया कि उन्होंने निर्माण शुरू करने से पहले निगम से कोई नक्शा पास नहीं करवाया था। इसी स्वीकारोक्ति और कागजों की कमी के बाद नगर निगम ने बिना किसी संकोच के इसे अवैध घोषित करते हुए ध्वस्त करने का फरमान जारी कर दिया।

नगर आयुक्त का बयान और आगे की राह

इस मामले पर जानकारी साझा करते हुए धनबाद के नगर आयुक्त आशीष गंगवार ने बताया कि इस भवन को लेकर उन्हें लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिसके बाद पूरे मामले की विधिवत जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि भवन निर्माण के दौरान स्थापित नियमों का उल्लंघन किया गया है। उन्होंने दोहराया कि किसी भी प्रकार के निर्माण से पूर्व सक्षम प्राधिकारी से नक्शा स्वीकृत कराना हर नागरिक का कर्तव्य है। यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था इस आदेश से असंतुष्ट है, तो उसे कानूनी रूप से न्यायालय या उच्च अधिकारी के समक्ष अपील करने का अधिकार प्राप्त है।

गैंगस्टर प्रिंस खान के नेटवर्क से जुड़े होने की चर्चा

स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई को केवल एक सामान्य अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान नहीं माना जा रहा है। चर्चा है कि गोल्डेन वेडिंग पैलेस के मालिक, जो स्क्रैप कारोबारी के रूप में पहचाने जाते हैं, उनका संबंध वासेपुर के कुख्यात और फरार गैंगस्टर प्रिंस खान से है। माना जा रहा है कि पुलिस पिछले काफी समय से प्रिंस खान के आर्थिक साम्राज्य और उसके करीबियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखे हुए है। इसी रणनीति के तहत प्रशासन अब उन संपत्तियों को चिन्हित कर रहा है, जो कथित आपराधिक नेटवर्क के आर्थिक आधार को मजबूती प्रदान करती हैं। हालांकि, आधिकारिक तौर पर निगम ने इसे केवल अवैध निर्माण का मामला ही बताया है, लेकिन करीब पांच महीने तक चली सुनवाई और उसके बाद आए इस निर्णय को प्रशासन की सख्त नीति के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 15 दिन की समय सीमा के भीतर भवन मालिक कार्रवाई करता है या प्रशासन को खुद बुलडोजर का रुख करना पड़ता है।

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