आम की बागवानी और सफलता का मंत्र
आम का मौसम भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन बागवानी करने वाले किसानों के लिए काम का असली दौर अब शुरू होता है। यदि आप आम का बाग लगाने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ छोटी मगर महत्वपूर्ण बातों को अपनाकर आप भविष्य में बेहतरीन उत्पादन हासिल कर सकते हैं। जमुई जिले के अनुभवी नर्सरी संचालक कनिष्क कुमार के अनुसार, अधिकतर किसान अच्छी नस्ल के पौधे तो चुन लेते हैं, लेकिन जमीन के चुनाव और मिट्टी की तैयारी जैसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका खामियाजा उन्हें कम पैदावार के रूप में भुगतना पड़ता है।
सही जगह और धूप का चुनाव
आम के पेड़ लगाने के लिए सबसे पहली शर्त ऐसी जगह का चुनाव करना है, जहां दिन भर अच्छी धूप उपलब्ध हो। आम का पौधा धूप का प्रेमी होता है। इसके साथ ही, इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बाग वाली जगह पर पानी का भराव बिल्कुल न हो। जल निकासी की समुचित व्यवस्था होना अनिवार्य है। कनिष्क का सुझाव है कि आम की खेती के लिए रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इसमें पौधों की जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं।
मानसून और तापमान का महत्व
पौधरोपण के लिए सबसे सटीक समय मानसून का होता है। कनिष्क ने बताया कि जब तापमान 24 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच हो, तब पौधे रोपना सबसे सुरक्षित रहता है। इस तापमान में पौधे न केवल तेजी से जड़ें जमाते हैं, बल्कि उनके सूखने का खतरा भी बहुत कम हो जाता है। साथ ही, मिट्टी की जांच करवाते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका पीएच मान 5.5 से 7.5 के बीच हो। मिट्टी का सही पीएच संतुलन पौधों की विकास दर को सीधे प्रभावित करता है।
किस्मों का चयन और मुनाफा
बाग से लगातार और बेहतर कमाई करने के लिए पौधों की किस्म का चुनाव बहुत समझदारी से करना चाहिए। किसान ऐसे पौधों को प्राथमिकता दें जो अलग-अलग समय पर फल देते हों। इससे यह फायदा होगा कि बाजार में आपके फल एक साथ नहीं आएंगे, बल्कि लंबे समय तक उपलब्ध रहेंगे, जिससे आपको बेहतर दाम मिल सकेंगे। इसके अलावा, ऐसी किस्मों का चयन करें जो कीटों और रोगों के प्रति अधिक प्रतिरोधी हों, ताकि दवाओं का खर्चा कम हो और फसल की गुणवत्ता बनी रहे।
खेत की तैयारी के अहम चरण
पेड़ लगाने से पहले खेत को तैयार करना ही सफलता की आधी नींव है। बाग लगाने से पहले पूरे क्षेत्र से खरपतवार और झाड़ियों को पूरी तरह नष्ट कर देना चाहिए। खेत की गहरी जुताई करने के बाद उसे कुछ दिनों के लिए खुला छोड़ देना चाहिए। इससे मिट्टी में धूप और हवा का संचार बेहतर होता है। व्यावसायिक स्तर पर बागवानी करने वाले किसानों को मिट्टी की जांच अनिवार्य रूप से करवानी चाहिए।
खाद और उर्वरक का प्रबंधन
मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए गोबर की सड़ी हुई खाद या कंपोस्ट का प्रयोग सबसे अच्छा माना गया है। आवश्यकतानुसार संतुलित उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए। कनिष्क कुमार ने सलाह दी है कि जरूरत पड़ने पर मिट्टी में चूना या सल्फर का उपयोग करके भी मिट्टी की गुणवत्ता को सुधारा जा सकता है। इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर कोई भी किसान अपने आम के बाग को हरा-भरा और फलदार बना सकता है, जिससे निश्चित ही बंपर कमाई का मार्ग प्रशस्त होगा।
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