शिक्षा और संस्कारों का अनूठा संगम
आज के दौर में एक अच्छे निजी स्कूल में बच्चे को पढ़ाना हर अभिभावक का सपना होता है, लेकिन महंगाई और आर्थिक बदहाली के कारण कई परिवार चाहकर भी अपने बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं दिला पाते हैं। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के कवड़िया गांव में संचालित मां शरणम् आश्रम ऐसे ही परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह शिक्षण संस्थान न केवल गरीब और अनाथ बच्चों को शिक्षित कर रहा है, बल्कि उन्हें एक बेहतर भविष्य के लिए भी तैयार कर रहा है। यहां गुरुकुल की प्राचीन परंपरा और आधुनिक शिक्षा पद्धति का बेहतरीन समन्वय देखने को मिलता है।
मुफ्त शिक्षा के साथ संपूर्ण सुविधाएं
इस संस्थान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां शिक्षा पूरी तरह से नि:शुल्क है। आर्थिक रूप से कमजोर और अनाथ बच्चों के लिए संस्था ने न केवल पढ़ाई, बल्कि रहने और खाने-पीने की भी मुफ्त व्यवस्था कर रखी है। संस्था की ओर से बच्चों का पूरा खर्च उठाया जाता है, जिससे गरीब माता-पिता पर किसी भी प्रकार का आर्थिक दबाव नहीं पड़ता। आचार्य महेश पाटीदार के अनुसार, पिछले 11 वर्षों से यह संस्थान निरंतर सेवा में जुटा हुआ है और अब तक कई बच्चे यहां से पढ़कर अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं।
अध्ययन का तरीका और दिनचर्या
आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने का अंदाज भी काफी अलग और सादगीपूर्ण है। कई कक्षाओं में बच्चे पारंपरिक रूप से दरी पर बैठकर पढ़ाई करते हैं। छात्रों की वेशभूषा भी भारतीय संस्कृति को दर्शाती है, जिससे उनमें अपने मूल्यों के प्रति जुड़ाव बना रहता है। स्कूल में मध्य प्रदेश बोर्ड के पाठ्यक्रम को आधार बनाया गया है, लेकिन इसके साथ ही योग, हवन, धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन और नैतिक शिक्षा को दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा माना गया है। दिन की शुरुआत प्रार्थना और सकारात्मक ऊर्जा के साथ होती है, जो बच्चों के मानसिक और आध्यात्मिक विकास में मदद करती है।
हुनर और कौशल विकास पर जोर
संस्थान का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसीलिए यहां बच्चों को शैक्षणिक विषयों के साथ-साथ इलेक्ट्रिशियन, कारपेंटर और प्लंबिंग जैसे व्यावहारिक हुनर भी सिखाए जाते हैं। संस्था का यह प्रयास है कि भविष्य में ये बच्चे किसी पर निर्भर न रहें और समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें। इतना ही नहीं, जो बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए भी संस्थान आर्थिक सहायता प्रदान करने में पीछे नहीं हटता है।
प्रवेश की प्रक्रिया और व्यवस्था
वर्तमान में इस परिसर में 150 से अधिक बच्चे प्रतिदिन नि:शुल्क शिक्षा ले रहे हैं, जबकि 50 से 60 छात्र आश्रम के छात्रावास में रहकर अध्ययन कर रहे हैं। हालांकि यहां हर कोई अपने बच्चों को पढ़ाना चाहता है, लेकिन संस्थान के नियम स्पष्ट हैं। आचार्य महेश पाटीदार स्पष्ट करते हैं कि प्राथमिकता उन्हीं बच्चों को दी जाती है जिनके पिता आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। इसके अलावा, छात्रावास में रहने की विशेष अनुमति केवल अनाथ बच्चों को ही दी जाती है।
धार्मिक और प्राकृतिक वातावरण
आश्रम परिसर का माहौल शिक्षा के लिए बेहद अनुकूल है। यहां राधा-कृष्ण, महादेव, हनुमान और माता काली के मंदिरों के साथ-साथ एक गुरुद्वारा, यज्ञशाला और ध्यान केंद्र भी स्थापित है। इन केंद्रों पर होने वाले नियमित धार्मिक आयोजन और आरती में बच्चे पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं। इसके अतिरिक्त, आश्रम के पास सुंदर गार्डन, गौशाला और जैविक खेती का संचालन भी होता है। यहां उगाई गई ताजी सब्जियां, फल और गौशाला का शुद्ध दूध बच्चों के दैनिक भोजन में शामिल किया जाता है, जो उन्हें शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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