मुजफ्फरपुर का आस्था का केंद्र
बिहार के मुजफ्फरपुर में गुदरी रोड पर स्थित एक प्राचीन शनिदेव मंदिर लोगों की आस्था और श्रद्धा का बड़ा केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर करीब 120 साल पुराना है। दूर-दराज के क्षेत्रों से लोग यहां अपनी परेशानियों से मुक्ति पाने की उम्मीद लेकर आते हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि दोष से पीड़ित भक्त विशेष रूप से यहां आकर पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर में शनिवार और अमावस्या के दिन भक्तों की भारी भीड़ देखी जाती है, जो अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए शनिदेव की शरण में आते हैं।
परंपरा और अनूठी मान्यता
इस मंदिर की सबसे खास और अनोखी परंपरा शनिदेव को काला छाता अर्पित करने की है। स्थानीय मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान को काला छाता भेंट करता है, उसके जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। भक्तों का मानना है कि ऐसा करने से शनिदेव की कृपा दृष्टि उनके ऊपर बनी रहती है, जिससे घर में सुख और समृद्धि का आगमन होता है। इसके अलावा भक्त यहां श्रद्धापूर्वक काला तिल, सरसों का तेल, तिल का तेल, लोहे की कील, लोहे के बर्तन और काले वस्त्र भी अर्पित करते हैं। ऐसी गहरी मान्यता है कि इन सामग्रियों को चढ़ाने से ग्रह-नक्षत्रों से जुड़ी प्रतिकूल स्थितियां कम होती हैं।
मंदिर का गौरवशाली इतिहास
मंदिर के मुख्य पुजारी राजीव कुमार शर्मा के अनुसार, इस पवित्र स्थान की स्थापना उनके परदादा चुन्नी लाल शर्मा ने लगभग 120 वर्ष पहले की थी। शुरुआत के दिनों में यह एक छोटा सा मंदिर हुआ करता था, लेकिन जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास बढ़ता गया, इसका स्वरूप भी बदलता गया। आज यह एक भव्य मंदिर के रूप में स्थापित है। मंदिर के गर्भगृह में शालिग्राम पत्थर से निर्मित शनिदेव की प्रतिमा विराजमान है, जो भक्तों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
पूजा और दर्शन का समय
मंदिर की व्यवस्था के बारे में पुजारी ने बताया कि भक्तों की सुविधा के लिए समय निर्धारित है। मंदिर सुबह खुलने के बाद दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है। इसके पश्चात दोपहर के समय मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। पुनः शाम 4 बजे मंदिर के पट खुलते हैं और श्रद्धालु रात 11 बजे तक दर्शन कर सकते हैं। विशेष रूप से प्रत्येक शनिवार और अमावस्या के दिन यहां विशेष पूजा, भव्य आरती और दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन किया जाता है, जिसमें भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कलयुग के न्यायाधीश का प्रभाव
स्थानीय निवासी संजय रजक का कहना है कि शनिदेव को कलयुग का न्यायाधीश माना जाता है। वे कहते हैं कि जो भी व्यक्ति यहां पूरी निष्ठा के साथ आता है, शनिदेव उसके कर्मों के अनुसार उसे फल प्रदान करते हैं। यह मंदिर न केवल मुजफ्फरपुर के लोगों के लिए, बल्कि पूरे बिहार के विभिन्न जिलों और पड़ोसी राज्यों से आने वाले भक्तों के लिए भी आस्था का प्रमुख स्तंभ है। भक्तों का अटूट विश्वास है कि इस मंदिर में की गई प्रार्थना कभी खाली नहीं जाती और शनिदेव सभी की कष्टों का निवारण अवश्य करते हैं।
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