सरकारी खजाने में भारी भरकम योगदान
सोमवार को केंद्र सरकार के खजाने में एक बड़ी रकम जमा हुई, जिसने वित्तीय जगत का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों ने एक साथ मिलकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 9,400 करोड़ रुपये से अधिक का लाभांश चेक सौंपा। यह महत्वपूर्ण वित्तीय लेनदेन नई दिल्ली में वित्तीय सेवा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ। सरकार देश के इन तमाम सरकारी बैंकों में सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसके चलते बैंकों द्वारा अर्जित मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा लाभांश के रूप में सरकारी कोष में आता है।
मुनाफे के पीछे की असली कहानी
सरकारी बैंकों द्वारा सरकार को दी गई यह भारी-भरकम राशि 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष के दौरान उनके शानदार कामकाज को दर्शाती है। हाल के समय में इन बैंकों ने परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया है और अपनी बैलेंस शीट को काफी मजबूत बनाया है। बैंकों के इस रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन ने न केवल बैंकिंग क्षेत्र के पुराने कीर्तिमानों को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि सरकारी बैंकों के वित्तीय स्वास्थ्य में जबरदस्त मजबूती आई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने मारी बाजी
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा बैंक ऑफ बड़ौदा की रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा ने इस बार लाभांश के रूप में सरकार को अब तक का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदान किया है। वित्त मंत्री के हाथों में चेक सौंपते समय बैंक प्रमुखों का उत्साह स्पष्ट रूप से देखा गया। सरकारी बैंकों का यह कदम सरकार की वित्तीय स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों की यह सफलता देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है, क्योंकि बेहतर वित्तीय स्वास्थ्य वाले बैंक देश में क्रेडिट के प्रवाह को अधिक सुगमता से आगे बढ़ा सकते हैं। सरकार को मिला यह वित्तीय सहयोग राजकोषीय प्रबंधन में भी एक बड़ी राहत लेकर आया है।
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