हुनर से बदली बाड़मेर की तस्वीर
राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके बाड़मेर में एक सकारात्मक बदलाव की लहर दौड़ रही है। यहां टीम बाड़मेर नाम के एक संगठन ने महिलाओं और बेटियों को स्वावलंबी बनाने की दिशा में जो बीड़ा उठाया है, उसके नतीजे अब साफ दिखाई देने लगे हैं। पिछले 8 वर्षों में इस संगठन ने 20 हजार से ज्यादा बेटियों को न सिर्फ प्रशिक्षित किया है, बल्कि उन्हें रोजगार के नए रास्तों से जोड़कर एक नई पहचान दी है। एक समय जो बेटियां केवल घरों की चारदीवारी तक सीमित रहती थीं, आज वे अपने कौशल के दम पर न केवल अपना खर्च उठा रही हैं, बल्कि परिवार की आर्थिक गाड़ी में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
प्रशिक्षण से स्वरोजगार तक का सफर
टीम बाड़मेर का यह अभियान केवल कौशल सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। जिला मुख्यालय पर हर वर्ष सैकड़ों युवतियों को सिलाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, मेहंदी कला, कुकिंग और हस्तशिल्प जैसे विभिन्न क्षेत्रों में दक्ष किया जाता है। संगठन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उन विधाओं में निपुण बनाना है, जिनकी मांग स्थानीय स्तर पर लगातार बनी रहती है। प्रशिक्षण के बाद, युवतियों को अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे वे आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें।
आर्थिक मजबूती और सामाजिक बदलाव
इस पहल से जुड़ी ईशा सोनी बताती हैं कि इस प्रशिक्षण के बाद न केवल उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है, बल्कि समाज और परिवार में भी उनके नजरिए को लेकर सकारात्मक बदलाव आया है। आज वे अपने पैरों पर खड़ी हैं और अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं। इसी प्रकार भाविका जैन का मानना है कि पहले उनके काम का दायरा केवल घर की दहलीज तक ही सीमित था, लेकिन तकनीकी प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने हुनर को कमाई का जरिया बना लिया है। आज ये युवतियां न केवल खुद कमा रही हैं, बल्कि कई अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़कर स्वरोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।
सफलता का नया मॉडल
टीम बाड़मेर की यह पहल अब पूरे जिले के लिए महिला सशक्तिकरण का एक सफल मॉडल बन चुकी है। इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इसमें शामिल होने वाली महिलाएं अब आत्मनिर्भरता का रास्ता जान चुकी हैं। रेगिस्तान की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, इन महिलाओं ने साबित कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और कौशल का साथ मिले, तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। पिछले 8 वर्षों का यह सफर हजारों परिवारों के जीवन में खुशहाली और आत्मविश्वास लेकर आया है। आज बाड़मेर की ये बेटियां न केवल जिले के विकास में भागीदार बन रही हैं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए आत्मनिर्भरता की एक मिसाल भी पेश कर रही हैं।
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