औद्योगिक शहरों में बढ़ता प्रदूषण और साइनस का खतरा
जमशेदपुर जैसे औद्योगिक रूप से सक्रिय शहरों में हवा की गुणवत्ता लगातार गिर रही है, जिसका सीधा असर वहां के निवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। शहर में स्थित बड़े उद्योग, सड़कों पर दौड़ते वाहनों से निकलता काला धुआं, निर्माण कार्य और हवा में उड़ती धूल के कारण आम लोगों की श्वसन प्रणाली पर बुरा असर पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक इस प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहता है, तो उसे साइनसाइटिस यानी साइनस जैसी बीमारी होने का गंभीर खतरा पैदा हो जाता है। साइनस की समस्या अब एक आम स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रही है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
क्या है साइनस और यह कैसे होता है?
ईएनटी यानी नाक, कान और गला विशेषज्ञ डॉ. बिमरजीत प्रधान बताते हैं कि साइनस दरअसल हमारी नाक के आसपास स्थित हवा से भरी छोटी-छोटी गुहाएं होती हैं। जब इन गुहाओं के अंदर किसी कारणवश सूजन आ जाती है या संक्रमण हो जाता है, तो उस स्थिति को साइनस कहा जाता है। जमशेदपुर जैसे शहरों में हवा में मौजूद धूल के बेहद महीन कण, वाहनों का धुआं और अन्य खतरनाक प्रदूषक तत्व सीधे तौर पर नाक के अंदरूनी हिस्सों को प्रभावित करते हैं। जब ये कण नाक के जरिए अंदर जाते हैं, तो वहां एलर्जी और संक्रमण की संभावना कई गुना बढ़ जाती है, जिससे साइनस की तकलीफ शुरू होती है।
साइनस के प्रमुख लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी
डॉ. बिमरजीत प्रधान के अनुसार, लोग अक्सर साइनस के शुरुआती लक्षणों को केवल सामान्य सर्दी-जुकाम मानकर भूल कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना बीमारी को और अधिक गंभीर बना सकता है। साइनस के मुख्य लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- लगातार नाक का बंद रहना।
- गंभीर सिरदर्द की समस्या।
- चेहरे और आंखों के आसपास असहनीय दबाव या दर्द महसूस होना।
- बार-बार छींक आने की समस्या।
- गले में लगातार खराश और खांसी रहना।
- सांस लेने में स्पष्ट कठिनाई महसूस होना।
यदि ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो इसे सामान्य सर्दी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज न मिलने से यह पुरानी बीमारी में तब्दील हो सकती है।
किन कारणों से बढ़ता है साइनस का जोखिम?
प्रदूषण के अलावा भी कई ऐसे कारक हैं जो साइनस की समस्या को और अधिक गंभीर बनाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग लंबे समय तक अत्यधिक धूल भरे वातावरण में काम करते हैं, उन्हें इसका खतरा ज्यादा होता है। इसके अलावा, धूम्रपान की आदत, शरीर की कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, बार-बार होने वाली एलर्जी और मौसम में अचानक आने वाले बदलाव भी साइनस को बढ़ावा देते हैं। बच्चों और बुजुर्गों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण उनमें साइनस का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
साइनस से बचाव के उपाय
डॉ. बिमरजीत प्रधान ने इस बीमारी से बचाव के लिए कुछ महत्वपूर्ण सलाह दी हैं, जिनका पालन करना अत्यंत आवश्यक है:
- मास्क का उपयोग: घर से बाहर निकलते समय हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले मास्क का प्रयोग करें। जहां धूल और धुआं अधिक हो, वहां मास्क पहनना सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
- पर्याप्त जलपान: शरीर को हाइड्रेटेड रखें और पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
- स्वच्छता: अपने घर और कार्यस्थल को नियमित रूप से साफ रखें ताकि धूल के कण कम जमा हों।
- जीवनशैली में बदलाव: धूम्रपान से दूरी बनाएं और अपने दैनिक आहार में संतुलित व पौष्टिक चीजों को शामिल करें।
विशेषज्ञ की महत्वपूर्ण सलाह
अंत में डॉ. प्रधान ने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति को नाक बंद रहने, सिरदर्द या सांस लेने में परेशानी जैसी समस्या लगातार हो रही है, तो उसे स्वयं दवाइयों का चुनाव नहीं करना चाहिए। मेडिकल स्टोर से बिना सलाह के दवा लेना हानिकारक हो सकता है। ऐसे में किसी योग्य ईएनटी विशेषज्ञ से तुरंत परामर्श लेना चाहिए। समय पर की गई जांच और सही उपचार से साइनस की समस्या को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। बढ़ते प्रदूषण के दौर में जागरूकता और सतर्कता ही साइनस जैसी बीमारियों से बचाव का सबसे कारगर हथियार है।
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