फर्जीवाड़े का बड़ा खेल उजागर
राजस्थान में चिकित्सा जगत से जुड़ी एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। राज्य की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप यानी एसओजी ने एक ऐसी संगठित साजिश का खुलासा किया है, जिसके जरिए फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट का उपयोग करके डॉक्टर बनने का काम किया जा रहा था। इस कड़ी कार्रवाई में पुलिस ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने विदेश से चिकित्सा की पढ़ाई तो की थी, लेकिन भारत में प्रैक्टिस के लिए जरूरी परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना ही फर्जीवाड़े का रास्ता चुना।
कौन हैं गिरफ्तार किए गए आरोपी
एसओजी द्वारा पकड़े गए तीनों आरोपियों की पहचान नवदीप तंबोलिया, चिराग साहू और आफरीदी खान के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला है कि इन लोगों ने विदेश से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की थी, लेकिन इसके बाद भारत में पंजीकरण करवाने के लिए इन्होंने फर्जी प्रमाणपत्रों का सहारा लिया। ये आरोपी सीधे राजस्थान मेडिकल काउंसिल यानी आरएमसी तक पहुंच गए और फर्जी दस्तावेजों के दम पर अपना पंजीकरण भी करवा लिया। इतना ही नहीं, उन्होंने विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों से अपनी इंटर्नशिप भी पूरी कर ली थी, जो इस पूरे घोटाले की गंभीरता को दर्शाता है।
कैसे चलता था यह फर्जीवाड़ा
जांच में एसओजी के हाथ कई महत्वपूर्ण सबूत लगे हैं। नवदीप तंबोलिया ने वर्ष 2022 में किरगिजिस्तान से एमबीबीएस पूरा किया था। उसने इस फर्जी सर्टिफिकेट को हासिल करने के लिए लगभग 25 लाख रुपये का भुगतान किया। इस पूरे सौदे में दिशांत टेलर नाम का व्यक्ति और दौसा निवासी शुभम गुर्जर की भूमिका सामने आई है। इसी फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नवदीप ने आरएमसी में पंजीकरण कराया और सरकारी दौसा मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी की।
इसी तरह चिराग साहू ने वर्ष 2023 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी। उसने विकास यादव नाम के व्यक्ति को लगभग 23.50 लाख रुपये देकर फर्जी एफएमजीई प्रमाणपत्र खरीदा। बाद में, उसने इसी फर्जीवाड़े के जरिए उदयपुर के पेसिफिक मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की। वहीं, आफरीदी खान ने वर्ष 2022 में कजाकिस्तान से एमबीबीएस किया और 25 लाख रुपये देकर शुभम गुर्जर से फर्जी सर्टिफिकेट प्राप्त किया। उसने राजकीय अलवर मेडिकल कॉलेज से अपनी इंटर्नशिप पूरी की थी।
नेटवर्क की जड़ें और अब तक की गिरफ्तारियां
एसओजी की जांच का दायरा काफी बड़ा है। फर्जी एफएमजीई सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने वाले शुभम गुर्जर और विकास यादव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इस पूरे गिरोह के मुख्य सूत्रधार भानाराम माली और एक दलाल भी अब एसओजी की हिरासत में हैं। इस मामले में अब तक 17 डॉक्टरों सहित राजस्थान मेडिकल काउंसिल के पूर्व रजिस्ट्रार, यूडीसी और एलडीसी स्तर के कई कर्मचारी गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जो इस मिलीभगत के गहरे जाल को साबित करता है।
रिमांड और आगे की कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहाँ से एसओजी ने उन्हें 4 जुलाई तक रिमांड पर लिया है। जांच एजेंसी का मानना है कि पूछताछ के दौरान इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और पूरे नेटवर्क का बड़ा पर्दाफाश हो सकता है। एसओजी के अतिरिक्त महानिदेशक यानी एडीजी विशाल बंसल ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
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