केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस हिरासत बढ़ी
पुणे में हुए केतन अग्रवाल हत्याकांड के मामले में जांच प्रक्रिया अब एक बेहद संवेदनशील चरण में पहुंच चुकी है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस ने अपनी दलीलों में स्पष्ट किया है कि इस हत्याकांड के पीछे कई गहरे राज दफन हैं, जिनका खुलासा होना अभी बाकी है। जांच एजेंसी का मानना है कि इन रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए दोनों आरोपियों से कड़ाई से पूछताछ करना और उन्हें हिरासत में रखना अत्यंत आवश्यक है।
क्राइम सीन और साक्ष्यों की तलाश
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि मामले की पूरी सच्चाई तक पहुंचने के लिए घटनास्थल को दोबारा समझना (क्राइम सीन रीक्रिएशन) अनिवार्य है। इससे हत्या की घटना की कड़ियों को वैज्ञानिक तरीके से जोड़ने में मदद मिलेगी। जांच टीम का मुख्य ध्यान उन सबूतों पर टिका है जो अभी तक बरामद नहीं किए जा सके हैं। पुलिस को संदेह है कि घटना को अंजाम देने के बाद सबूतों को मिटाने की एक सोची-समझी कोशिश की गई थी, जिसे उजागर करना जांच की प्राथमिकता है।
पासपोर्ट और कपड़ों की बरामदगी
जांच के दौरान पुलिस के सामने यह तथ्य आया है कि सिया गोयल ने कथित तौर पर केतन अग्रवाल का पासपोर्ट फाड़ दिया था और उसे जला दिया गया था। पुलिस अब उस पासपोर्ट के अवशेषों और उससे जुड़े अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को बरामद करने के लिए कड़ी मशक्कत कर रही है। इसके साथ ही, आरोपी चेतन चौधरी के उन कपड़ों की भी व्यापक स्तर पर तलाश की जा रही है, जो उसने हत्या के तुरंत बाद बदले थे। पुलिस का मानना है कि ये कपड़े मामले में निर्णायक साक्ष्य साबित हो सकते हैं और आरोपियों को इनके जरिए फंसाया जा सकता है।
डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल्स पर जोर
हत्याकांड के बाद सिया और चेतन के बीच फोन पर हुई बातचीत पुलिस के रडार पर है। जांच एजेंसी इन कॉल डिटेल्स के रिकॉर्ड को खंगालने की तैयारी कर रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना के बाद उनकी क्या योजना थी। पुलिस ने अदालत के समक्ष दावा किया है कि आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूतों को डिलीट करने का प्रयास किया है। अब पुलिस इन डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ले रही है, जिसके लिए आरोपियों का सहयोग अनिवार्य है।
कोर्ट में पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलें
पुलिस ने आरोपियों की 7 दिन की कस्टडी की मांग करते हुए अदालत में तर्क दिया कि डिजिटल डेटा हासिल करने और साजिश की तह तक जाने के लिए समय चाहिए। वहीं, दूसरी ओर बचाव पक्ष के वकीलों ने गिरफ्तारी को पूरी तरह गलत ठहराया। उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि जिन आधारों पर पुलिस ने ये गिरफ्तारियां की हैं, वे तथ्यहीन हैं और FIR में दर्ज की गई जानकारियां वास्तविकता से दूर हैं। दोनों पक्षों की विस्तार से सुनवाई करने के बाद, माननीय न्यायालय ने सिया गोयल और चेतन चौधरी को 3 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश जारी कर दिया। अब पुलिस इस समय सीमा के भीतर हत्याकांड की पूरी साजिश, घटना के बाद अपनाए गए कदमों और अन्य छिपे हुए पहलुओं का सच सामने लाने का प्रयास करेगी।
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