ग्वालियर में प्यार का जाल: हर महीने गायब हो रही 24 नाबालिग बेटियां, दो साल में 544 ने छोड़ा घर

ग्वालियर में नाबालिग लड़कियों के घर छोड़ने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें से ज्यादातर मामले सोशल मीडिया पर पनपे प्रेम संबंधों से जुड़े हैं। पुलिस द्वारा बरामद की जाने वाली अधिकांश किशोरियां अपने माता-पिता के साथ लौटने से इनकार कर देती हैं और वन स्टॉप सेंटर में रहना पसंद कर रही हैं।

सोशल मीडिया के जाल में फंस रही किशोरियां

ग्वालियर में नाबालिग लड़कियों के लापता होने का सिलसिला लगातार चिंताजनक बना हुआ है। बीते दो वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सामने आता है कि कुल 544 नाबालिग लड़कियां अपने घर से गायब हुई हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में हर महीने औसतन 24 नाबालिग लड़कियां घर से लापता हो रही हैं। पुलिस द्वारा की गई जांच और बरामदगी के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इनमें से करीब 70 फीसदी मामलों के पीछे सोशल मीडिया पर पनपा प्रेम प्रसंग मुख्य कारण पाया गया है।

जब परिवार को ही ठुकरा देती हैं बेटियां

पुलिस जब इन गायब हुई लड़कियों को देशभर के विभिन्न हिस्सों से तलाश कर बरामद करती है, तो कई बार स्थिति बिल्कुल विपरीत होती है। कई लड़कियां पुलिस के सामने ही अपने परिजनों के साथ जाने से साफ इनकार कर देती हैं। वे अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद पर अड़ी रहती हैं। चूँकि ये लड़कियां नाबालिग होती हैं, इसलिए कानूनी प्रक्रियाओं के तहत पुलिस इन्हें चाइल्ड वेलफेयर कमेटी यानी CWC के समक्ष पेश करती है। वहां बयान दर्ज होने के बाद इन लड़कियों को बालिग होने तक वन स्टॉप सेंटर भेजा जा रहा है। वर्तमान में केवल ग्वालियर के वन स्टॉप सेंटर में ही ऐसी 34 किशोरियां रह रही हैं, जो बरामद होने के बावजूद अपने परिवार के साथ जाने को राजी नहीं हैं।

मामलों के पीछे की कड़वी सच्चाई

ग्वालियर पुलिस के रिकॉर्ड और घटनाओं का विश्लेषण करने पर कुछ हैरान कर देने वाली स्थितियां सामने आई हैं:

  • एक 17 वर्षीय छात्रा, जो 12वीं कक्षा में पढ़ती थी, उसकी इंस्टाग्राम पर वृंदावन के एक युवक से दोस्ती हुई। परिजनों ने जब उसे मोबाइल इस्तेमाल करने से टोका, तो वह प्रेमी के बुलावे पर अपना घर छोड़कर वृंदावन भाग गई।
  • वर्ष 2021 में बहोड़ापुर इलाके की एक 17 वर्षीय किशोरी लापता हो गई थी। जांच के दौरान पता चला कि उसी दिन चिंटू नाम का एक युवक भी गायब हुआ था। नवंबर 2025 में पुलिस ने आरोपी को प्रयागराज से पकड़ा। जब वह लड़की घर लौटी, तब तक वह एक 2 साल के बच्चे की मां बन चुकी थी।
  • मुरार की एक 15 साल की किशोरी बहुत ज्यादा समय मोबाइल पर चैटिंग में बिताती थी। मां ने जब मोबाइल छीना तो वह घर से भाग निकली। बाद में पुलिस ने उसे राजस्थान से बरामद किया, जहां वह अपने प्रेमी के साथ रह रही थी।

पुलिस की कार्रवाई और ऑपरेशन मुस्कान

पुलिस ने इन मामलों को चुनौती के रूप में लिया है। पिछले दो सालों में पुलिस ने लापता लड़कियों में से 98 फीसदी को सफलता के साथ बरामद किया है। वहीं, हाल ही में घर छोड़कर गायब हुई किशोरियों की तलाश के लिए देशभर में 'ऑपरेशन मुस्कान' चलाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण लड़कियां अपने परिवार की बंदिशों को बोझ समझने लगी हैं। वे अपने ऑनलाइन साथी पर परिवार से कहीं ज्यादा भरोसा करती हैं, जिसके चलते वे घर की चारदीवारी से दूर चली जाती हैं। हालांकि, पुलिस लगातार उन्हें ढूंढने का प्रयास कर रही है और सफलता भी मिल रही है।

परिवारों के लिए चेतावनी और सलाह

विशेषज्ञों और काउंसलरों का कहना है कि यह केवल पुलिस का मुद्दा नहीं है, बल्कि परिवारों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। नाबालिग बच्चियों के घर छोड़ने की बढ़ती घटनाएं समाज के लिए एक बड़ा संकेत हैं। माता-पिता को अब अपनी बेटियों की गतिविधियों पर बारीक नजर रखनी होगी। यह जानना बेहद जरूरी है कि वे मोबाइल और इंटरनेट पर क्या देख रही हैं, किससे संपर्क में हैं और उनके मन में क्या चल रहा है। केवल टोकना या मोबाइल छीन लेना समाधान नहीं है, बल्कि बच्चों को पर्याप्त समय देकर उन्हें सही और गलत का फर्क समझाना समय की मांग है।

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