सेशेल्स की भौगोलिक स्थिति और विस्तार
हिंद महासागर के विस्तार में स्थित सेशेल्स एक ऐसा द्वीपीय देश है जिसने अपनी प्राकृतिक सुंदरता के दम पर पूरी दुनिया में अपनी अलग जगह बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया यात्रा के बाद यह छोटा सा देश फिर से वैश्विक सुर्खियों में आ गया है। सेशेल्स मुख्य रूप से 115 छोटे-बड़े द्वीपों का एक समूह है। अगर हम बात करें इसके कुल क्षेत्रफल की, तो यह लगभग 455 से 460 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है, जो इसे अफ्रीकी महाद्वीप का आकार के मामले में सबसे छोटा देश बनाता है। इसकी कुल आबादी लगभग 1.2 लाख के आसपास है। इस देश की राजधानी विक्टोरिया है, जो इसके मुख्य द्वीप महे पर स्थित है। विक्टोरिया को दुनिया की सबसे छोटी राजधानियों की सूची में शुमार किया जाता है। सेशेल्स की स्थिति अफ्रीका के पूर्वी तट से तकरीबन 1600 किलोमीटर की दूरी पर है।
द्वीपों का बसेरा और जनजीवन
सेशेल्स के सभी 115 द्वीप एक जैसे नहीं हैं। इनमें चट्टानी ग्रेनाइट वाले द्वीप और कोरल यानी मूंगे से बने द्वीप शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन सभी द्वीपों पर मानव बस्ती नहीं है। केवल करीब 33 द्वीपों पर ही लोग स्थायी रूप से निवास करते हैं। बाकी के द्वीप या तो निर्जन हैं या फिर उन्हें पर्यावरण के संरक्षण के लिए सुरक्षित रखा गया है। राजधानी विक्टोरिया का आकार भी बेहद सीमित है, जहां की आबादी लगभग 30 हजार के करीब है। हालांकि, इतने छोटे शहर में भी आपको औपनिवेशिक शैली की शानदार इमारतें और स्थानीय बाजारों की जीवंतता देखने को मिलती है। यहाँ का वातावरण काफी शांत और सुकून भरा है, जिसके कारण यह पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है।
दुनिया के सबसे खूबसूरत समुद्र तट
जब दुनिया के बेहतरीन समुद्री तटों की चर्चा होती है, तो सेशेल्स का उल्लेख अनिवार्य हो जाता है। यहां का 'अंसे सोर्स डी अर्जेंट' बीच विश्व प्रसिद्ध है, जो ला डिग द्वीप पर स्थित है। इस बीच की विशेषता यहां का पारदर्शी नीला पानी, मखमली सफेद रेत और विशाल ग्रेनाइट की चट्टानें हैं। यही कारण है कि पर्यटन उद्योग यहां की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी है। हर साल लाखों की संख्या में सैलानी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती को निहारने आते हैं।
विशाल कछुओं का अनूठा घर
सेशेल्स की पहचान केवल उसके समुद्र तटों तक सीमित नहीं है। यह देश विशाल 'एल्डाब्रा' कछुओं का घर भी है। मुख्य रूप से एल्डाब्रा एटोल में इन कछुओं की आबादी एक लाख से अधिक है। ये कछुए अपनी लंबी उम्र के लिए जाने जाते हैं, जो 150 साल तक जीवित रह सकते हैं। इनका वजन भी काफी अधिक, लगभग 250 किलोग्राम तक हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सेशेल्स यात्रा के दौरान इन अनोखे कछुओं को देखा था, जो वहां के वन्यजीव संरक्षण का एक बड़ा प्रतीक हैं।
सेना का अभाव और शांतिपूर्ण नीति
दुनिया के अधिकांश देशों के पास अपनी विशाल स्थायी सेना होती है, लेकिन सेशेल्स इस मामले में बिल्कुल अलग है। इस देश के पास कोई स्थायी सैन्य बल नहीं है। यहां की आंतरिक सुरक्षा और बाहरी निगरानी की जिम्मेदारी मुख्य रूप से पुलिस बल और कोस्ट गार्ड द्वारा निभाई जाती है। यह देश अपना पूरा ध्यान शांति बनाए रखने, अपने समुद्री संसाधनों के प्रबंधन और पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को और अधिक विकसित करने पर केंद्रित करता है।
भारत के साथ रणनीतिक संबंध
सेशेल्स का स्थान हिंद महासागर के बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर स्थित है, जो इसे रणनीतिक रूप से अत्यंत कीमती बनाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करने वाले जहाज यहीं से होकर गुजरते हैं, इसीलिए भारत, फ्रांस, अमेरिका और चीन जैसे देशों की नजर इस छोटे से द्वीप पर रहती है। भारत के साथ सेशेल्स के रिश्ते बेहद प्रगाढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वहां के राष्ट्रीय दिवस के गोल्डन जुबली समारोह में बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने वहां के राष्ट्रपति से मुलाकात के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। भारत ने सेशेल्स को फास्ट पेट्रोल वेसल जैसी कई सैन्य सहायता पहले भी प्रदान की है, जिससे समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग को और मजबूती मिली है।
अर्थव्यवस्था के मुख्य स्तंभ
सेशेल्स की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से दो बड़े स्तंभों पर टिकी है। पहला, पर्यटन उद्योग, जो यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत माहौल की बदौलत फलता-फूलता है। दूसरा, मछली पकड़ने का व्यवसाय, जिसमें टूना मछली का निर्यात देश के लिए विदेशी मुद्रा कमाने का बड़ा जरिया है। प्रति व्यक्ति आय के आधार पर, सेशेल्स को अफ्रीका के सबसे समृद्ध और धनी देशों में गिना जाता है।
कोको डेमेर: प्रकृति का अनोखा उपहार
सेशेल्स की वनस्पतियों में 'कोको डेमेर' का विशेष स्थान है। यह पूरी दुनिया में अपने विशाल आकार के लिए प्रसिद्ध है और इसे दुनिया का सबसे भारी बीज माना जाता है। एक बीज का वजन लगभग 30 किलोग्राम तक हो सकता है। यह मुख्य रूप से प्रास्लिन द्वीप पर स्थित 'वैले दी मै' इलाके में पाया जाता है। यह पेड़ और इसका बीज सेशेल्स की सांस्कृतिक और प्राकृतिक पहचान का एक अहम हिस्सा बन चुके हैं।
विशाल समुद्री इलाका
भले ही सेशेल्स की जमीन का हिस्सा केवल 459 वर्ग किलोमीटर के आसपास हो, लेकिन इसका समुद्री क्षेत्र बेहद विशाल है। इसका 'एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन' (EEZ) लगभग 13 से 13.5 लाख वर्ग किलोमीटर तक फैला है। इसका मतलब यह है कि देश का समुद्री इलाका उसकी जमीन से लगभग 3000 गुना बड़ा है। यहां का समुद्री जल दुनिया के सबसे स्वच्छ जल क्षेत्रों में से एक है, जिसमें 900 से ज्यादा प्रजातियों की मछलियां और अन्य समुद्री जीव पाए जाते हैं। यह स्कूबा डाइविंग और समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के शौकीनों के लिए स्वर्ग के समान है।
संस्कृति और संरक्षण
सेशेल्स की संस्कृति को 'क्रिओल' संस्कृति कहा जाता है, जिसमें अफ्रीकी, यूरोपीय और एशियाई परंपराओं का संगम दिखता है। यहां की आधिकारिक भाषाओं में अंग्रेजी, फ्रेंच और सेशेल्वा क्रिओल शामिल हैं। वर्ष 1976 में यह देश ब्रिटेन से स्वतंत्र हुआ था। पर्यावरण के प्रति भी यह देश दुनिया के लिए एक मिसाल है। यहां के कई प्राकृतिक क्षेत्र यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, जो दर्शाते हैं कि सेशेल्स अपने जंगलों, दुर्लभ जीवों और समुद्री जैव विविधता को बचाने के लिए कितना जागरूक है।
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