जापान और अमेरिका की सैन्य ड्रिल पर भड़का उत्तर कोरिया, दी गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी

जापान और अमेरिका द्वारा किए जा रहे संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर उत्तर कोरिया ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्योंगयांग ने इसे युद्ध की तैयारी करार देते हुए जापान को अपनी सैन्य गतिविधियों के खिलाफ आगाह किया है।

उत्तर कोरिया का जापान पर सीधा हमला

उत्तर कोरिया ने अमेरिका और जापान के बीच हाल ही में आयोजित किए जा रहे संयुक्त सैन्य अभ्यासों को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है। प्योंगयांग ने इस सैन्य गतिविधि को क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए बड़ा खतरा करार दिया है। उत्तर कोरिया का स्पष्ट रूप से मानना है कि यह महज एक नियमित अभ्यास नहीं, बल्कि आने वाले समय में संभावित युद्ध की सीधे तौर पर रिहर्सल की जा रही है। उन्होंने जापान को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अपनी आक्रामक सैन्य गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाता है, तो उसे इसके बहुत गंभीर और खतरनाक परिणामों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

सैन्य अभ्यासों पर गहरा असंतोष

उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए ने अपने संपादकीय में इस पूरे मामले पर विस्तार से चर्चा की है। लेख में विशेष रूप से जापान की ग्राउंड सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज और अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के बीच चल रहे रिजॉल्यूट ड्रैगन सैन्य अभ्यास का जिक्र किया गया है। उत्तर कोरिया ने आरोप लगाया है कि इस तरह के सैन्य साझा अभियानों के माध्यम से जापान न केवल अपनी सैन्य ताकत का विस्तार कर रहा है, बल्कि वह भविष्य में एक हमलावर राष्ट्र की भूमिका निभाने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। प्योंगयांग के अनुसार, अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग में निरंतर बढ़ोतरी पूर्वी एशिया की सुरक्षा स्थिति को और अधिक नाजुक और अस्थिर बना रही है।

पुराने अभ्यासों का भी जिक्र

उत्तर कोरिया ने अपनी आलोचना में केवल हालिया घटनाओं को ही नहीं, बल्कि बीते समय के सैन्य अभ्यासों को भी आधार बनाया है। उन्होंने इस साल फरवरी में आयोजित हुए आयरन फिस्ट संयुक्त सैन्य अभ्यास को याद दिलाते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम क्षेत्र में जानबूझकर तनाव पैदा करने वाले कदम हैं। प्योंगयांग ने आगे आरोप लगाया कि अप्रैल और मई के दौरान अमेरिका के नेतृत्व में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में हुए बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में जापान ने पहली बार हिस्सा लिया। इस दौरान जापान ने लंबी दूरी की मिसाइलों से संबंधित परीक्षण भी किए। उत्तर कोरिया का दावा है कि इन तमाम अभ्यासों का गुप्त उद्देश्य पड़ोसी देशों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की तैयारी करना था।

जापान की बढ़ती सैन्य महत्वकांक्षा पर सवाल

उत्तर कोरिया ने अपने आधिकारिक बयान में यह तर्क दिया है कि जापान मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का लाभ उठाना चाहता है। उसका मानना है कि टोक्यो अपनी रक्षा नीति को ढाल बनाकर खुद को फिर से एक बड़ी सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करने की फिराक में है। रिपोर्ट में कहा गया कि जापान अपनी रक्षा नीति का दायरा लगातार बढ़ा रहा है और इसे सही साबित करने के लिए वह क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों का बहाना लेता है। हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि इस बार प्योंगयांग का पूरा ध्यान और आलोचना का केंद्र मुख्य रूप से जापान रहा, न कि अमेरिका।

उत्तर कोरिया की अपनी सैन्य तैयारी

एक तरफ जहां उत्तर कोरिया जापान और अमेरिका की आलोचना कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह खुद भी अपनी सैन्य शक्ति को तेजी से बढ़ाने में जुटा हुआ है। प्योंगयांग ने हाल ही में 5,000 टन क्षमता वाले अपने नए बहुउद्देशीय विध्वंसक युद्धपोत चोए ह्योन को आधिकारिक रूप से अपनी नौसेना में शामिल किया है। इस विशेष अवसर पर आयोजित समारोह में उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन ने जोर देकर कहा कि यह नया युद्धपोत देश की समुद्री शक्ति को अभूतपूर्व तरीके से मजबूत करेगा।

क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञों की चिंता

किम जोंग-उन का मानना है कि इस नए युद्धपोत के बेड़े में शामिल होने से उत्तर कोरिया की समुद्री युद्ध क्षमता में बड़ा इजाफा हुआ है। इस युद्धपोत को पहली बार पिछले साल सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था। नौसेना में आधिकारिक रूप से शामिल किए जाने से पहले, इससे कई प्रकार के घातक हथियारों का सफल परीक्षण भी किया जा चुका है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि एक ओर अमेरिका, जापान और उनके सहयोगी देश संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जरिए सुरक्षा को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर कोरिया अपनी सैन्य क्षमताओं और संसाधनों के विस्तार में लगा हुआ है। इस द्विपक्षीय तनाव के कारण कोरियाई प्रायद्वीप और पूर्वी एशिया में सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।

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