खेती के साथ बागवानी में छिपी है समृद्धि की राह
आज के दौर में जब युवा नौकरी की तलाश में शहरों की ओर भाग रहे हैं, झारखंड के लातेहार जिले के रहने वाले पंकज कुमार मिश्रा ने अपने ही क्षेत्र में रहकर मिसाल कायम की है। प्रकृति के प्रति उनका गहरा लगाव और हरियाली को बढ़ावा देने की सोच उन्हें एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित कर चुकी है। लातेहार के किनामाड़ बिजली कार्यालय के समीप स्थित उनकी सदाबहार नर्सरी आज इस क्षेत्र में बागवानी का एक प्रमुख केंद्र बन चुकी है। कभी छोटे स्तर से शुरू किया गया यह काम आज एक बड़े और मुनाफे वाले व्यवसाय में तब्दील हो चुका है, जिससे पंकज प्रतिमाह 40,000 से 50,000 रुपये तक की शानदार आय प्राप्त कर रहे हैं।
दुर्लभ पौधों का अद्भुत संग्रह
पंकज मिश्रा बताते हैं कि उनकी नर्सरी की सबसे बड़ी पहचान यहां मिलने वाली आम की अनोखी और दुर्लभ किस्में हैं। आम के शौकीनों के लिए यहां मियां जाकी जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर किस्म से लेकर चार किलो वजन तक के आम देने वाले पौधे उपलब्ध हैं। इसके अलावा नर्सरी में अल्फांसो और जर्दालू जैसी प्रीमियम प्रजातियों के पौधे भी बागवानी प्रेमियों को खूब लुभा रहे हैं।
उनकी नर्सरी में केवल आम ही नहीं, बल्कि कई अन्य विदेशी और दुर्लभ फलदार पौधों की लंबी श्रृंखला मौजूद है। लोग यहां से मुख्य रूप से निम्नलिखित पौधों की खरीदारी करना पसंद करते हैं:
- अंजीर और एवोकाडो
- कीवी और काजू
- कटहल और जामुन
- अमरूद की आठ अलग-अलग उन्नत किस्में
पंकज के अनुसार, नर्सरी में मिलने वाले लगभग छह फीट ऊंचे आम के पौधे की कीमत 2,000 रुपये के आसपास है, और इसकी खासियत यह है कि इन्हें लगाने के बाद अगले जनवरी महीने से ही ये पौधे फल देना शुरू कर देते हैं।
सजावटी और औषधीय पौधों की मांग
सदाबहार नर्सरी केवल फलदार पौधों तक ही सीमित नहीं है। यहां औषधीय और सजावटी पौधों का भी विशाल भंडार मौजूद है। पंकज ने बताया कि उनके पास करीब 100 प्रकार के फूल और शो-प्लांट उपलब्ध हैं, जो घरों, बगीचों और कार्यालयों की खूबसूरती को चार चांद लगा देते हैं। इन सजावटी पौधों की शुरुआती कीमत मात्र 50 रुपये है और ये 800 रुपये तक की रेंज में उपलब्ध हैं। विभिन्न संस्थानों और घरों को सजाने के लिए लोग बड़ी संख्या में यहां पहुंचते हैं।
अनुभव से मिली सफलता की सीख
पंकज कुमार मिश्रा की इस सफलता के पीछे उनके वर्षों का कठिन परिश्रम और बागवानी का जमीनी अनुभव है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने गांव में 13 एकड़ के बड़े क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों का एक विस्तृत बाग विकसित किया है। इसी बागवानी के अनुभव को आधार मानकर उन्होंने अपनी छोटी सी नर्सरी शुरू की थी। सही मार्गदर्शन, पौधों की गुणवत्ता और अपने ग्राहकों के भरोसे को बरकरार रखने के कारण ही आज उनकी यह नर्सरी एक सफल व्यवसाय का रूप ले चुकी है।
अपनी सफलता को साझा करते हुए पंकज कहते हैं कि यदि व्यक्ति के अंदर मेहनत करने का जज्बा, धैर्य और प्रकृति के प्रति सच्चा लगाव हो, तो कम लागत में भी नर्सरी का व्यवसाय आय का एक बेहतरीन और सम्मानजनक जरिया बन सकता है। आज उनका यह सफर उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो खेती और बागवानी के क्षेत्र में स्वरोजगार की नई संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं और आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं।
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