स्कूटी पर सवार होकर निकले डिप्टी सीएम
आमतौर पर राजनेताओं का नाम लेते ही सुरक्षा घेरा और सरकारी गाड़ियों का लंबा काफिला आंखों के सामने आ जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में रविवार को एक बिल्कुल अलग दृश्य देखने को मिला। राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने किसी भी तरह के तामझाम या वीआईपी प्रोटोकॉल को दरकिनार करते हुए खुद स्कूटी संभाली और शहर की सड़कों पर निकल पड़े। उनके सिर पर हेलमेट था और वे एक आम नागरिक की तरह बिलासपुर की गलियों में घूमते नजर आए। उनके इस औचक निरीक्षण के दौरान बेलतरा के विधायक सुशांत शुक्ला और महापौर पूजा विधानी भी उनके साथ मौजूद रहीं, जिन्होंने भी स्कूटी का ही सफर चुना।
औचक निरीक्षण का उद्देश्य
डिप्टी सीएम के इस तरह अचानक सड़कों पर उतरने के पीछे एक ठोस रणनीति थी। शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, पुल-बैराज और मुख्य सड़कों के निर्माण को लेकर जनता की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं। अक्सर जब प्रशासनिक अधिकारी या मंत्री भारी सुरक्षा बल के साथ दौरे पर निकलते हैं, तो स्थानीय अमला सतर्क हो जाता है और केवल वही हिस्से दिखाए जाते हैं जो ठीक होते हैं। अरुण साव इस व्यवस्था के दिखावे को खत्म करना चाहते थे। वे उन तंग रास्तों और निर्माण स्थलों तक पहुंचना चाहते थे जहां सरकारी गाड़ियां आसानी से नहीं जा पातीं। इस दौरे से उन्हें निर्माण कार्यों की असल गुणवत्ता और चल रही धीमी रफ्तार का जमीनी अंदाजा लग गया।
प्रोजेक्ट्स का लिया 'लाइव' टेस्ट
करीब 3 घंटे तक चले इस कड़े निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्मार्ट सिटी और पीडब्ल्यूडी (PWD) की महत्वपूर्ण परियोजनाओं की बारीकी से जांच की। उपमुख्यमंत्री ने मंगला स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कोनी के कन्वेंशन सेंटर, शिवघाट बैराज, अटल पथ और अशोकनगर-बिरकोना सड़क निर्माण का निरीक्षण किया। मंगला में चल रहे 10 एमएलडी और 6 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज प्लांट के कार्य में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर वे बेहद नाराज नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद नगर निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे को स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि संबंधित ठेकेदार तय समय-सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध तत्काल कानूनी कदम उठाए जाएं और आवश्यकता होने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाए।
अरपा नदी के लिए 251 करोड़ का महाप्रोजेक्ट
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू बिलासपुर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली अरपा नदी के संरक्षण से जुड़ा रहा। वर्तमान में शहर के लगभग 70 छोटे और बड़े नालों का गंदा पानी बिना किसी उपचार के सीधे नदी में मिल रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। इस समस्या के स्थायी हल के लिए नगर निगम ने 250 करोड़ 93 लाख रुपये, यानी करीब 251 करोड़ रुपये की एक महापरियोजना तैयार की थी। उपमुख्यमंत्री ने मौके पर ही इस प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी। इस बजट के माध्यम से नदी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए आधुनिक ढांचा खड़ा किया जाएगा। इसके तहत 17 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी 70 नालों को रोकने की व्यवस्था होगी। योजना के अनुसार, शहर में 57 स्थानों पर इंटरसेप्शन एवं डाइवर्जन स्ट्रक्चर बनाए जाएंगे और 10 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन बिछाई जाएगी।
ट्रैफिक और बुनियादी समस्याओं पर दिशा-निर्देश
दौरे के अंतिम पड़ाव में अरुण साव ने शहर में ट्रैफिक बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मुख्य मार्गों पर अव्यवस्थित तरीके से खड़े बिजली के खंभों और खतरनाक ट्रांसफार्मरों को तत्काल व्यवस्थित किया जाए। डिप्टी सीएम का यह स्पष्ट संदेश था कि शहर के विकास कार्यों में गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका यह अनौपचारिक और सक्रिय अंदाज प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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