मुरादाबाद में सैन्य गौरव का नया प्रतीक
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में भारतीय सेना के पराक्रम, त्याग और बलिदान को समर्पित देश का पहला डिजिटल वॉर मेमोरियल बनकर पूरी तरह तैयार हो चुका है। यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का अपनी तरह का पहला ऐसा केंद्र है, जो न केवल मुरादाबाद बल्कि पूरे राज्य के लिए एक विशेष धरोहर के रूप में उभरेगा। इस अनूठे मेमोरियल में 1947 से लेकर कारगिल युद्ध तक के प्रमुख सैन्य अभियानों, सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी महत्वपूर्ण सैन्य कार्रवाइयों को डिजिटल स्क्रीन, आकर्षक लाइट-साउंड शो और इंटरैक्टिव पैनल के जरिए जीवंत किया जाएगा। इसका प्राथमिक उद्देश्य देश की युवा पीढ़ी को भारतीय जवानों की शहादत और समर्पण से जोड़ना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां देश के गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा ले सकें। अब यह मेमोरियल उद्घाटन के लिए पूरी तरह तैयार है।
11 महीने के रिकॉर्ड समय में निर्माण
मुरादाबाद के नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने इस परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इसे त्रिशूल भारतीय रक्षा संग्रहालय द्वारा मात्र 11 महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि जब कारगिल विजय के 25 वर्ष पूरे हुए थे, तब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की ओर से आह्वान किया गया था कि देश के वीर जवानों के सम्मान में कुछ विशेष कार्य किए जाने चाहिए। इसी प्रेरणा से प्रेरित होकर मुरादाबाद नगर निगम ने इस म्यूजियम को बनाने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने स्वयं इस स्थान का दौरा कर इस प्रोजेक्ट की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी, जिसके बाद इसे तेजी से पूरा किया गया।
तीनों सेनाओं का एक साथ संगम
यह मेमोरियल केवल एक सामान्य संग्रहालय नहीं है, बल्कि इसे एक व्यापक इंटरैक्टिव जोन के रूप में विकसित किया गया है। यहाँ थल सेना, नौसेना और वायु सेना—तीनों अंगों की उपलब्धियों और उनसे संबंधित ऑपरेशंस को एकीकृत रूप से दर्शाया गया है। यह स्थान युवाओं को सेना की कार्यप्रणाली समझने का भी मौका देता है। यहाँ विभिन्न रैंक के अधिकारियों की वर्दी, उनके द्वारा लगाए जाने वाले रैंक और समय के साथ इनमें आए बदलावों को समझाने के लिए विशेष इंटरैक्टिव मॉडल लगाए गए हैं। यह उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है जो सेना में जाने का सपना देखते हैं।
रक्षा मंत्रालय और डीआरडीओ का सहयोग
संग्रहालय को समृद्ध बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय और रक्षा मंत्री का विशेष सहयोग मिला है। यहाँ MIG-21 का टैंक और अन्य महत्वपूर्ण हथियार प्रदर्शित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त DRDO की ओर से भारतीय मिसाइल सिस्टम, ड्रोन और विशाखापट्टनम जैसे नौसेना के युद्धपोतों के सटीक मॉडल भी यहाँ मौजूद हैं। संग्रहालय में एक विशेष लेजर गन सपोर्ट सेटअप भी लगाया गया है, जो इसे एक कंपैक्ट और आधुनिक म्यूजियम का स्वरूप देता है। कुल मिलाकर यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सैन्य शिक्षा और प्रेरणा का एक बड़ा केंद्र सिद्ध होगा।
प्रेरणा के पीछे का व्यक्तिगत अनुभव
नगर आयुक्त दिव्यांशु पटेल ने साझा किया कि इस मेमोरियल के पीछे उनके व्यक्तिगत अनुभव भी काम आए। उन्होंने बताया कि वे पूर्व में CRPF में सहायक कमांडेंट के रूप में चयनित हुए थे और उन्होंने NCC में C सर्टिफिकेट भी हासिल किया है। एक युवा के मन में सेना की उपलब्धियों को लेकर जो उत्सुकता और आकांक्षा रहती है, उसी जज्बे को उन्होंने इस म्यूजियम में पिरोने की कोशिश की है। वे चाहते थे कि युवाओं को राष्ट्रभक्ति का एक ठोस संदेश मिल सके।
देश का सबसे अनूठा डिजिटल संग्रहालय
इस मेमोरियल की विशिष्टता पर बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि मेजर जनरल और जनरल रैंक के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यहां का दौरा किया है। उनके फीडबैक के अनुसार, पूरे देश में इस तरह का आधुनिक और डिजिटल तकनीकों से लैस संग्रहालय मौजूद नहीं है। यह अपनी तरह का एकमात्र और सबसे उन्नत म्यूजियम है। यहाँ खेल की व्यवस्था के साथ-साथ DRDO का एक समर्पित फ्लोर भी तैयार किया गया है। यह परिसर पूर्ण रूप से बनकर तैयार है और शीघ्र ही मुख्यमंत्री के कर कमलों द्वारा इसका भव्य उद्घाटन किया जाएगा। यह मुरादाबाद को राष्ट्रीय गौरव के एक नए मानचित्र पर स्थापित करेगा।
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